धान के मौसम से ही नाराजगी झेल रहे अन्नदाताओं से विधाता गेहूं के मौसम में भी बुरी तरह रुठा हुआ है। चंद दिनों पहले गिरे ओलों से बर्बाद हुई गेहूं की फसल अभी खड़ी भी नहीं हो पाई थी कि शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात में बादल कहर बन कर बरसे। रात में हवा संग तेज बारिश के बाद जिलों में अलग अलग स्थानों पर औसतन 9.4 मिलीमीटर बारिश हो गई।
खेतों में पकी फसल फिर गिरने लगी है और कटी फसल के सड़ने का अंदेशा हो गया है। करीब पांच फीसदी फसल खेतों में कटी पड़ी है। इसके पहले भी बारिश के चलते किसानों की 40 से 70 फीसदी तक फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और एक दर्जन किसान दम तोड़ चुके हैं। बारिश के चलते आम के बौर भी झरे हैं। हालांकि अभी दाना नहीं निकले के कारण बहुत नुकसान नहीं है। हालांकि अगले सप्ताह आंधी बारिश फिर आने की आशंका है। उस समय तक अमिया आ चुकी होंगी और उनके गिरने की आशंका बढ़ जाएगी। रामनगर के किसानों ने मसूर और लाहटा की फसल में अस्सी फीसदी से ज्यादा नुकसान का दावा करते हुए एसडीएम को पत्र भेजकर फिर से सर्वे की मांग की है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. रामतेज का कहना है कि किसान खेतों में पानी हरगिज न रहने दें। गेहूं सही से सुखाकर निकासी करें।
लौकी तोरई भी खतरे में
बारिश के अलावा दिन और रात के तापमान में अधिक अंतर के कारण कद्दू वर्गीय फसलें मसलन लौकी, तोरई, खीरा पर संकट के आसार हैं। इस अंतर के चलते कीड़े बढ़ेंगे और पालेज की फसलों में कीड़ा लगने की आशंका है। टमाटर और बैंगन भी इससे प्रभावित होंगे। इन फसलों की पत्तियों का बदला हुआ रंग पोषक तत्वों की कमी अभी से दर्शा रहा है।
ओलों ने गेहूं का मिल्किंग स्टेज (बीज में दूध आने की अवस्था)को बिगाड़ दिया था। अब कितनी भी बेहतर वैरायटी का गेहूं हो, दाना कमजोर ही निकलेगा। गेहूं और भूसा दोनों का वजन कम निकलेगा और मार्केट में रेट अच्छा नहीं मिलेगा।
वीरेंद्र नाथ, कृषि विशेषज्ञ
बीमे तमाम, बताएंगे नहीं तो किस काम
खाद कंपनियां, सहकारिता से लेकर मंडी भी देती है बीमा लाभ
बरेली। फसल बर्बाद होने से सदमे के चलते मौत और आत्महत्या के बाद किसानों का दर्द महसूस किया जा रहा है। इसी दर्द को पहले महसूस कर किसानों को उन्हें मिलने वाले बीमा लाभ के बारे में बताया जाता तो शायद कुछ जानें बच सकती थीं। कई बीमा ऐसे हैं जो निजी खाद कंपनियां या विभाग मामूली अंशदान लेकर करते हैं।
खाद बीमा: सहकारी समितियों से मिलने वाली इफ्को खाद का एक बैग लेने पर किसान का चार हजार रुपये का निशुल्क दुर्घटना बीमा होता है। वह अधिकतम 25 बैग के साथ एक लाख रुपये तक बीमित हो सकता है। किसान के नाम खाद खरीद की स्लिप होनी चाहिए। डीएओ डॉ. रामतेज यादव बताते हैं कि जिले में 28 फरवरी तक इफ्को ने 839240 यूरिया बैग बेचे हैं। इस लिहाज से बीमित किसानों की संख्या भी एक लाख से अधिक है।
सहकारी समिति बीमा: सहकारिता विभाग की व्यक्तिगत बीमा योजना के तहत समिति से खाद या लोन लेने वाले सदस्यों के खाते से हर साल एक अक्तूबर को 9.40 रुपये काटे जाते हैं। सहकारी बैंक के जीएम आलोक गुप्ता बताते हैं कि इतनी कम रकम से किसान साल भर के लिए बीमित हो जाते हैं। अप्राकृतिक मृत्यु में क्लेम करने पर उसके परिवार को 50 हजार और अपंगता में 25 हजार मिलते हैं। जिले में इस वक्त 42000 किसान योजना में बीमित हैं।
मंडी परिषद की बीमा योजना: इसके बारे में किसान जागरूक हैं। एक बिसवां जमीन वाले किसान को भी दुर्घटना की स्थिति में सरकार पांच लाख रुपये देती है। मंडी की जनता दुर्घटना बीमा योजना भी इसी श्रेणी के किसानों को लाभान्वित करती है। मंडी सचिव एसएस यादव बताते हैं कि कृषि कार्य करते किसान की मृत्यु होने पर क्लेम के बाद आश्रितों को दो लाख रुपये दिए जाते हैं। अंगभंग में भी मुआवजा मिलता है। इसके लिए पहले कोई क्लेम नहीं लिया जाता।
मीरगंज में मकान ढहा, दर्जन भर घायल
मीरगंज। रामपुर रोड पर बसे लभारी गांव में नंदराम वर्मा का खपरैलदार पुराना मकान साढ़े नौ बजे बूंदाबांदी के बीच ढह गया। बरामदे में खाना बना रही नंदराम की पत्नी भगवानदेई और पड़ोसी ओमप्रकाश का बेटा उमेश कुमार मलबेे में दबकर घायल हो गए। दोनों को सीएचसी मीरगंज से जिला अस्पताल भिजवा दिया गया है। इनके अलावा नंदराम वर्मा , चंद्रपाल, राघवेंद्री, नितिन , गुड्डी , ओमप्रकाश की 12 वर्षीया बेटी माला, दर्शन देवी, मायादेवी आदि भी घायल हो गए। पशुशाला में बंधे पशु भी जख्मी हो गए। एसडीएम कुंवर पंकज ने राजस्व टीम के साथ मौका मुआयना कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।
आंधी ने उड़ाया बिजली का फ्यूज
बरेली। शुक्रवार रात से शुरू हुए आंधी-पानी के दौर ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था को हिला कर रख दिया। कई इलाकाें में तार टूट गए तो कई खंभे भी धराशायी हो गए। कुदेशिया फाटक के पास शनिवार सुबह पांच बजे एक ट्रक ने टक्कर मारकर पांच खंभे गिरा दिए। इसके चलते एमबीए इंटर कालेज व कुदेशिया फाटक के आसपास के इलाकाें में सप्लाई गुल हो गई। सुबह पांच बजे से गई बिजली रात आठ बजे आई। सबसे ज्यादा दिक्कत सरस्वती शिशु मंदिर, बीडीए कॉलोनी, एमबी इंटर कॉलेज व इज्जतनगर को सप्लाई देने वाली लाइनों में रही। वहीं, पूर्वांचल नगर गेट पर लगा एक खंभा आंधी के कारण टेढ़ा हो गया। इससे सुबह करीब सवा नौ बजे आईवीआरआई परिसर में बिजली गुल हो गई। यहां दोपहर बारह बजे के बाद सप्लाई शुरू हुई। उधर, सुभाषनगर, कुतुबखाना, कोहाड़ापीर, हरुनगला, शहदाना, जगतपुर, संजयनगर, दुर्गानगर, मॉडल टाउन व अन्य कई इलाकाें में भी दिनभर सप्लाई बाधित रही। परसाखेड़ा के पास हाईवे किनारे हाई वोल्टेज लाइन पर पेड़ गिर गया। इससे फतेहगंज पश्चिमी सब स्टेशन के खिरका जगतपुर, कुरतरा समेत 200 से ज्यादा गांवों और दो कस्बों की बिजली सप्लाई ठप हो गई। बसई और दुनका के पटेल नगर मोहल्लेे में भी तार टूटने से बिजली गुल हो।
सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने देखी बर्बाद फसल
बरसेर। सांसद धर्मेंद्र कश्यप शनिवार को रामनगर ब्लॉक के हरदासपुर, व्योंधन खुर्द, लीलौर, धनौरा गौरी, सोना आदि गांवों में पहुंचे और किसानों क बर्बाद फसल का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को सही सर्वे रिपोर्ट बनाकर मुआवजा देना चाहिए। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि लेखपालों ने गांव में एक ही जगह पर बैठकर सर्वे रिपोर्ट तैयार की है। गांव में ऐसे कई लोग हैं जिनका 50 फीसदी से ज्यादा नुकसान हुआ है। संासद ने कहा कि हम लगातार सही सर्वे की मांग कर रहे हैं मगर सरकारी मशीनरी कुछ नेताओं के इशारे पर ही काम कर रही हैं।
डीएम ने 24 घंटे में मांगी नुकसान की रिपोर्ट
निर्देश, राजस्व वसूली में उत्पीड़न न करें अफसर
बरेली। नुकसान के सदमे से किसानों की लगातार हो रही मौत पर जिला प्रशासन ने विविध देयों की राजस्व वसूली के दौरान उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न करने की सख्त हिदायत दी है। डीएम गौरव दयाल ने अपने कैंप कार्यालय पर शनिवार को बुलाई गई तहसीलदारों की बैठक में बताया कि शासन किसानों से मुख्य देयों की वसूली पर पहले ही 30 जून तक रोक लगा चुका है। उन्होंने लेखपालों को 28 और 29 मार्च को हुई बारिश से फसलों को हुए नुकसान की सर्वे रिपोर्ट 24 घंटे के अंदर देने का निर्देश दिया।
डीएम ने एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश दिया गया कि जहां भी किसानों की मौत की सूचनाएं मिली हैं वहां तत्काल मौके पर जाकर जांच करें और वस्तुस्थिति की रिपोर्ट दें। शिशुपाल के आश्रितों के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पांच लाख रुपये के मदद स्वीकृत हो गई है। अन्य प्रकरणों में अलग से आर्थिक सहायता के लिए संस्तुति भेजी गई है। राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना से भी 30-30 हजार रुपये की सहायता देने के लिए कार्रवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि कृषि बीमा योजना के जरिये भी किसानों को सहायता दिलाई जाएगी। क्राप कटिंग के बाद जिन इलाकों में 50 फीसदी से ज्यादा नुकसान पाया जाएगा, उनमें बीमा कंपनी क्षतिपूर्ति देगी।
डीएम ने जिला कृषि अधिकारी डा. रामतेज यादव को निर्देश दिया कि किसान हितों की योजनाओं से उन किसानों को प्राथमिकता के आधार पर लाभ दिलाएं जिनकी फसल का नुकसान हुआ है। बैठक में एडीएम वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार भी मौजूद थे।
डेढ़ हजार किसानों को 1.5 करोड़ रुपये
बरेली। एडीएम वित्त मनोज कुमार ने बताया कि करीब डेढ़ हजार किसानों को फसल नुकसान के मामले में पहली किस्त में 1.50 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई है। असिंचित भूमि के मामले में नौ हजार रुपये प्रति हेक्टेयर और सिंचित भूमि के मामले में 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक मुआवजा देने का प्रावधान है। जिले में 28 से 49 फीसदी तक नुकसान वाले फसलों का सर्वे कर अलग रिपोर्ट भेजी गई है। साथ ही दैवी आपदा में मरने वाले व्यक्ति के आश्रित परिवारजन को अब पांच लाख रुपये आर्थिक सहायता देने का प्रावधान हो गया है जो पहले डेढ़ लाख रुपये था।
अप्रैल में भी निकला स्वेटर
बरेली। शुक्रवार-शनिवार रात मूसलाधार बारिश और तेज हवा के चलते अप्रैल महीने में भी स्वेटर निकल आया है। सामान्य से दस डिग्री कम हुए अधिकतम तापमान और 15-20 किमी प्रतिघंटा रफ्तार से चली हवाओं ने लोगों को कंपा दिया। अप्रैल महीने में होने वाली औसतन 10.8 मिलीमीटर बारिश में 9.4 मिमी बारिश एक ही दिन में हो गई। पिछले सात सालों में यह दूसरा मौका है जब अप्रैल महीने में सबसे अधिक बारिश हुई है। इससे पहले एक अप्रैल 2014 को तकरीबन 10.9 एमएम बारिश हुई थी। बारिश के चलते शनिवार को अधिकतम तापमान 25.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 17.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। मौसम विभाग की वेबसाइट की मानें तो रविवार को मौसम खुला रहेगा लेकिन सोमवार को फिर तेज हवा के साथ हल्की बूंदे पड़ने की आशंका जताई गई है। वहीं मौसम विज्ञानी एचएस कुशवाहा का कहना है कि रविवार दोपहर तक मौसम पूरी तरह साफ हो जाएगा।
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किसान मौत साइड स्टोरी
फोटो
01-मृतक का फाइल फोटो-
02-मृतक का मकान-
03-मृतक की बेटा व बेटी
-04 खेत पर फसल देखता लेखपाल
-05-मृतक के पिता बनीराम।
बुढ़ापे में देखना पड़ा यह दिन
बिशारतगंज। कंधरपुर गांव में सदमे से मरे कृष्ण पाल के 85 साल के पिता बेनी राम लोधी का कहना है कि उन्होंने अपनी 10 बीघा जमीन छह बेटों में बांट दी थी। हालांकि जमीन बेनीराम के नाम ही दर्ज है लेकिन सभी अपने-अपने हिस्से की जमीन पर खेती करते है। कृष्ण पाल दूसरे नंबर के थे। उसके दो बेटे मनोज, सुनील और बेटी अनीता हैं। सुनील छठी में पढ़ता है। बेनी राम लोधी ने रोते हुए कहा कि कभी सोचा भी नही था कि बुढ़ापे में ये दिन भी देखने पड़ेंगे। डेढ़ बीघा जमीन पर गुजारा न हो पाने के कारण कृष्णपाल ने अपने बेटे मनोज को मजदूरी करने के लिए हिमाचल भेज दिया और खुद गांव में मजदूरी करने लगा। बैंक का कर्ज तो जैसे-तैसे चुका लिया था मगर लोगों का कर्ज अब भी सिर पर था।
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तनाव में रहता था गोविंदराम
फोटो---04एमआरजेड-गोविंदराम मौर्य (मृतक फाइल फोटो)
मीरगंज। पिछले महीने भर में कई बार हो चुकी बेमौसमी भारी बारिश, ओलावृष्टि ने खेतों से घर लाने लायक कुछ नहीं छोड़ा। इस कारण गोविंदराम भारी तनाव में रहता था। वहां खून-पसीने की गाढ़ी कमाई से तैयार गेहूं, मसूर की पूरी फसल मिट्टी में मिली देख भारी सदमे से उसका दिल बैठ गया। लड़खड़ाते कदमों से किसी तरह घर वापस लौटा तो लेकिन लौटते ही दिल का दौरा पड़ गया। जब तक घर वाले कुछ समझ पाते गोविंद ने दम तोड़ दिया। बता दें कि हुरहुरी के ही एक किसान वेदराम गंगवार ने भी फसलों की तबाही और सरकारी-साहूकारों के भारी कर्जे, मोटे सूद का बोझ न झेल पाने पर फांसी लगाकर आत्म हत्या कर ली थी। इलाके में अब तक सदमे से चार किसानों की मौत हो चुकी है। इनमें रम्पुरा किसानान के 36 वर्षीय प्रेमपाल वर्मा, मीरगंज में आ बसे जौनेर के पप्पू गुप्ता और बहादुरगंज के 55 वर्षीय असगर अली शाह शामिल हैं।
शीशगढ़ के किसान का फोटो : 04एमआरजैड पीएसएचजी लालता प्रसाद
हाफिजगंज का फोटो एचएफ जे 01 मे डोरीलाल।
मृतक किसानों के घर पहुंचा प्रशासन
टांडाछंगा। बर्बाद हो चुकी फसल के सदमे में मरे किसान वहीद अहमद के घर शनिवार को हलका लेखपाल और कानूनगो राजस्व टीम के साथ पहुंचे। उन्होंने आर्थिक सहायता दिलाने का भरोसा दिलाया। टीम ने बर्बाद हुई फसल का जायजा भी लिया। तहसीलदार अजय कुमार उपाध्याय ने भी उसके बेटों से फोन पर बात कर आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया।
उधर, हाफिजगंज में संतोषपुर के किसान रामस्वरूप की मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं हो पाया है। इस कारण बिसरा सुरक्षित रख लिया गया है। तहसील प्रशासन के निर्देश पर लेखपाल ने दो लाख रुपये के मुआवजे की फाइल बनाकर भेजी है। भाजपा नेता भुजेंद्र गंगवार शनिवार को मृतक के घर पहुंचे और घर वालों को दस लाख का मुआवजा दिलाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस बारे में डीएम से बात की जाएगी। उधर, अमर उजाला में खबर छपने के बाद हरकत में आए लेखपालों ने नुकसान की रिपोर्ट तैयार की है। थाना समाधान दिवस पर पहुंचे लेखपाल को किसानों ने नुकसान के बारे में बताया था।
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नीचे की खबरों से जगह के अनुसार कोट लिए जा सकते हैं।
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खेतों में सड़ने लगी फसल
मीरगंज। बेमौसमी आंधी बारिश ने इस साल किसानों की कमर ही तोड़कर रख दी है। गेहूं, मसूर, लाही-सरसों के खेत के खेत चौपट देख अन्नदाता किसान का दिल बैठा जा रहा है। काश्तकार पिछली आंधी-बारिश से खेतों में बिछे पड़े पके गेहूं की बालियों को समेटने की जुगत में लगे थे, लेकिन शुक्रवार रात कई घंटे तक हुई तेज बारिश ने उनकी इन कोशिशों पर भी पानी फेर दिया है। खेतों में पानी भरने से गेहूं की बालियां सड़ने लगी हैं। बसई गांव के भगवानदास कश्यप का डेढ़ एकड़ गेहूं खेत में बिछा पड़ा है। बालियां तक भीगकर सड़ने लगी हैं। इसी गांव के सतीश गंगवार का दो एकड़ गेहूं खेत में बिछा पड़ा है। खेत खाली करने के लिए फसल पलटने को मजबूर हैं।
04बीएचआर 3 पी- किसान हाजी मंसूब अली खां
04बीएचआर 4 पी- किसान राकेश गंगवार
04बीएचआर 5 पी- किसान सरदार लखविंदर सिंह।
बहेड़ी में बड़ा नुकसान
बहेड़ी। दमखोदा, शेरगढ़ ब्लाक के किसानों का बड़ा नुकसान हुआ है। तहसील प्रशासन ने करीब सात हजार किसानों की लिस्ट तैयार कर ली है। देवरनियां इमरता निवासी नरायन दास का कहना है कि सारा कुछ गेहूंपर निर्भर था। अगर फसल मारी गई तो खाने के भी लाले पड़ जाएंगे। भुलनियां गांव के वेद प्रकाश ने बताया कि उसने आठ बीघा जमीन पर गेहूं की ही फसल लगाई थी। रिछा क्षेत्र के रियाज अहमद व सिराजउददीन, कुंडरा के कोमिल प्रसाद, ढाकन लाल,मूल चंद्र कहते हैं कि इस बार की बारिश ने तो किसान को हर तरफ से चौपट कर दिया है। इससे किसान भयंकर आर्थिक संकट में पड़ जायेगा। शेरगढ़ के हनीफ अहमद व दिलीप कुमार ने बताया कि एक तरफ गन्ने का भुगतान अभी तक नही मिला है दूसरा अब गेंहू भी चौपट हो गया है। टांडाछंगा के किसान चौ रामस्वरूप सिंह का कहना है कई साल पहले इस तरह की वर्षा ने गेंहू की फसल को चौपट कर दिया था। इस साल तैयार फसल आंखो के सामने स्वाह हो रही है। बहेड़ी के रिछौला निवासी सरदार लखविंदर सिंह कहते हैं कि गन्ने का रकवा घटाकर गेंहू का रकवा बढ़ा दिया था लेकिन रब जाने क्या होगा। करीब बीस एकड़ गेहू की फसल जमीन में गिर गई है। कुंवरगढ़ा के किसान राकेश गंगवार का कहना है बारिश ने सब चौपट कर दिया। हाजी मंसूब अली खां कहते हैं कि पहले सरसों की फसल चौपट हुई अब गेंहू की फसल वर्षा के साथ चली तेज हवाओ से गिर गई है।
आंवला में सड़ने लगा गेहूं
आंवला। ओला और बरसात से जो फसल बच गई वह आंधी से बर्बाद हो गई। खेतों में पानी भर जाने से गेहूं की फसल को काटना संभव नहीं है। एसडीएम आर्यका अखौरी ने बताया कि दुबारा तेज हवा और बरसात से नुकसान का सर्वे करवाया जा रहा है। पथरी के किसान नेकसू लाल ने कहा कि साढे़ नौ बीघा जमीन पर कटा पड़ा गेहूं बर्बादी के कगार में पहुंच गया है। पूरनलाल और केवल राम कहते है बडी मेहनत करके चार चार बीघा गेहूं का दाना मिल पाना मुश्किल है। तहसीलदार मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि किसी किसान को परेशान होने की जरूरत नहीं है सभी के नुकसान का सर्वे होगा और पात्र लोगों को इसका मुआवजा दिलवाया जायेगा।
868 किसानों के चेक बनाए
आंवला। तहसील प्रशासन ने मुआवजे की दूसरी सूची जारी करते हुये क्षेत्र के 868 किसानों को पात्र माना है। तहसीलदार मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक 12 लाख रुपये की राशि दी जा चुकी है।
किसानों की उम्मीद पर पानी
फरीदपुर। बरसात और आंधी से किसानाें की उम्मीद भी खत्म हो गई है। उन्हें कर्ज चुकाने का डर सता रहा है। अशोकपुर के किसान रज्जाक का कहना है कि उनकी करीब छह बीघा जमीन है। साहूकार से ढाई रुपये प्रति सैकड़ा के ब्याज पर दस हजार रुपये लिए थे। गेहूं खेत में सड़ने लगा है और जो गेहूं बच भी गया उसकी बाली पूरी तरह से खराब हो चुकी है। अब कर्ज चुकाने की दिक्कत है। मोहल्ला मिर्धान निवासी ताहिर बेग ने साठ हजार और और लल्ला ने लगभग सवा लाख रुपये बैंक से लोन लिया लिया है। ताहिर बेग का कहना था कि कुम्हेडे में नुकसान हो गया तो ब्याज नहीं चुका पाए।
कोट
पचास से अस्सी प्रतिशत तक किसानों का नुकसान हुआ है। जिन किसानों के गेहूं खड़े है और हरे हैं उनका आंकलन बाद में किया जाएगा। पिछले सर्वे और इस सर्वे को मिलाकर रिपोर्ट रविवार को भेजी जाएगी।
- उदभव त्रिपाठी, तहसीलदार, फरीदपुर