किसानों की मौत के सिलसिले पर गंभीर जिला प्रशासन ने किसानों से विविध देयों की राजस्व वसूली के दौरान उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न करने की हिदायत दी है। डीएम गौरव दयाल ने अपने कैंप कार्यालय पर शनिवार को बुलाई गई तहसीलदारों की बैठक में बताया कि शासन पहले ही किसानों से मुख्य देयों की वसूली पर 30 जून तक रोक लगा चुका है। उन्होंने लेखपालों को 28 और 29 मार्च को हुई बारिश से फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कर 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।
एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश दिया गया है कि जहां भी किसानों की मौत की सूचनाएं मिली हैं वहां तत्काल मौके पर जाकर जांच करें और वस्तुस्थिति की रिपोर्ट दें। शिशुपाल के आश्रितों के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पांच लाख रुपये के मदद स्वीकृत हो गई है। अन्य प्रकरणों में अलग से आर्थिक सहायता के लिए संस्तुति भेजी गई है। राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना से भी 30-30 हजार रुपये की सहायता देने के लिए कार्रवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि कृषि बीमा योजना के जरिये भी किसानों को सहायता दिलाई जाएगी। क्राप कटिंग के बाद जिन इलाकों में 50 फीसदी से ज्यादा नुकसान पाया जाएगा, उनमें बीमा कंपनी क्षतिपूर्ति देगी।
डीएम ने जिला कृषि अधिकारी डा. रामतेज यादव को निर्देश दिया कि किसानों की सहायता के लिए सभी योजनाओं से उन किसानों को प्राथमिकता के आधार पर लाभ दिलाएं जिनकी फसल का नुकसान हुआ है। बैठक में एडीएम वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार भी मौजूद थे।
डेढ़ हजार किसानों को 1.5 करोड़ रुपये
बरेली। एडीएम वित्त मनोज कुमार ने बताया कि करीब डेढ़ हजार किसानों को फसल नुकसान के मामले में पहली किस्त में 1.50 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई है। असिंचित भूमि के मामले में नौ हजार रुपये प्रति हेक्टेयर और सिंचित भूमि के मामले में 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक मुआवजा देने का प्रावधान है। जिले में 28 से 49 फीसदी तक नुकसान वाले फसलों का सर्वे कर अलग रिपोर्ट भेजी गई है। साथ ही दैवी आपदा में मरने वाले व्यक्ति के आश्रित परिवारजन को अब पांच लाख रुपये आर्थिक सहायता देने का प्रावधान हो गया है जो पहले डेढ़ लाख रुपये था।