बरेली। किला पुल पीडब्ल्यूडी के भ्रष्टाचार का बोझ और ज्यादा ढोने की हालत में नहीं बचा है। पुरानी सड़क हटाए बगैर कई बार नई सड़क बना दिए जाने से पुल का वजन इतना ज्यादा हो चुका है कि उसके ज्यादातर ज्वाइंट ढीले हो गए हैं। भारी वाहनों की धमक से पुल कंपकंपाने लगा है। सेतु निगम ने पीडब्ल्यूडी को अलर्ट किया है कि अगर जल्द मरम्मत न हुई तो पुल एक साल बाद चलने लायक नहीं बचेगा।
शहर के सर्वाधिक व्यस्त दिल्ली हाईवे पर किला ओवरब्रिज करीब 40 साल पहले बना था। उस वक्त घोषणा की गई थी कि यह पुल 60 साल तक चलेगा लेकिन भ्रष्टाचार ने पुल को समय से पहले ही जर्जर कर दिया। बड़ा बाईपास बनने के बाद इस पुल पर ट्रैफिक का लोड कुछ कम हुआ है लेकिन रोजाना करीब डेढ़-दो लाख वाहन अब भी गुजरते हैं। काफी समय से इस पुल को इतने ट्रैफिक के लिए खतरनाक बताया जा रहा है, अब सेतु निगम ने पीडब्ल्यूडी को सीधी चेतावनी जारी कर दी है।
किला पुल की दशा सबसे ज्यादा इसकी सड़क के नवीनीकरण की वजह से हुई। किसी भी पुल का वजन स्थिर रखने के लिए पुरानी सड़क को हटाकर ही नई सड़क बनाई जाती है लेकिन पीडब्ल्यूडी के अफसर पैसे खाने के लिए पुरानी सड़क पर ही नई सड़क बनाते रहे। इस वजह से पुल का वजन इतना बढ़ गया कि वह खुद ही तेजी से जर्जर होने लगा। कभी पुल की सड़क के लेवल से करीब डेढ़ फुट ऊंचा था लेकिन अब सड़क और फुटपाथ का लेवल एक बराबर हो गया है।
दीवार पर पीपल के पेड़, टूटी ग्रिल सुरक्षा दीवार भी गिरने की हालत में
करीब पांच साल से पुल की हालत काफी खराब है। पुल के ज्वाइंट इस कदर हिल रहे हैं कि सीबीगंज की ओर से जैसे ही कोई भारी वाहन उस पर चढ़ता हैं तो पुल का पूरा कोना खतरनाक ढंग से कंपकंपाने लगता है। चारों ओर लगी लोहे की ज्यादातर ग्रिल जंग खाकर टूट चुकी है और अब कभी भी गिरने की स्थिति में है। पुल की दीवार पर जगह-जगह पीपल के पेड़ उग आए हैं। पुल की सुरक्षा दीवार भी कई जगह ढह गई है और बाकी भी ढहने की हालत में है। कुछ समय पहले पुल की सड़क में भी बड़े-बड़े छेद हो गए थे, लेकिन पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने उन्हें कंक्रीट से भरवा दिया।
सुझाव देने नहीं आई रुड़की आईआईटी की टीम
किला पुल की खतरनाक हालत पर किसी की नजर न पड़े और उस पर ट्रैफिक भी गुजरता रहे, कोई ओर न देख पाए और वाहन इस पर गुजरते जाएं, इस मंशा से पुल की सड़क पर एक के बाद एक कोलतार की कई मोटी परत चढ़ा दी गईं। इससे सड़क इतनी ऊबड़-खाबड़ हो चुकी है कि रफ्तार गुजरने वाले वाहनों के बेकाबू होने तक का खतरा है। दो साल पहले पीडब्ल्यूडी ने इस पुल की पुरानी कोलतार की परतें हटाने का सुझाव देने के लिए आईआईटी रुड़की की टीम को बुलावा भेजा था लेकिन वहां से कोई टीम नहीं आई।
सड़क पर हुए छेदों में भी भर दिया कोलतार
कुछ दिनों पहले पुल के ऊपर कई बड़े गड्ढे हो गए थे। पुल पर बनी सड़क के वजन से नीचे जिन सरियों के जाल पर कंक्रीट का स्लैब टिका हुआ है, वह भी नीचे लचक गया था लेकिन अब यह सब दिखाई नहीं दे रहा। बताते हैं कि कोलतार की परत चढ़ाते समय पुल पर दिख रहे सरियों को ढक दिया गया। पुल ऊपर से देखने में ठीक लग रहा है। अंदर का खोखलापन नजर नहीं आ रहा है।
शासन की टीम भी दे चुकी है चेतावनी
पिछले साल पुल का निरीक्षण करने के लिए शासन की टीम आई थी जिसने पुल की जांच के बाद चेतावनी दी थी कि इस पुल की तत्काल मरम्मत नहीं की गई तो यह खतरनाक साबित हो सकता है, बावजूद इसके अफसर नहीं जागे। अब सेतु निगम के अधिकारियों ने भी चेताया है। सेतु निगम के एक अधिकारी ने बताया कि पुल की यदि मरम्मत हो जाती है तो इसकी उम्र दस साल तक बढ़ सकती है।
पिछले साल एक करोड़ मांगे थे, अब चार करोड़, मरम्मत क्या होगी, यह साफ नहीं
पीडब्ल्यूडी ने अब किला पुल की मरम्मत के लिए शासन से चार करोड़ की मांग की है। पिछले साल एक करोड़ रुपये मांगे गए थे। लिहाजा इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल यह भी साफ है कि पीडब्ल्यूडी अफसरों के लिए अभी यह साफ नहीं है कि पुल पर कोलतार की पुरानी परतों को कैसे हटाया जाएगा। इसीलिए उन्होंने आईआईटी रुड़की की टीम को बुलावा भेजा था, लेकिन वहां से टीम आई ही नहीं। सवाल उठ रहा है कि चार करोड़ से आखिर क्या मरम्मत कराई जाएगी। शहर के जनप्रतिनिधि भी कुतुबखाना और सुभाषनगर पर पुल बनाने जैसे नए प्रोजेक्ट लाने के लिए तो जीजान का जोर लगा रहे हैं लेकिन किला पुल की हालत का किसी को ख्याल नहीं है।
किला पुल की मरम्मत के लिए चार करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव की मंजूरी के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही पैसे की व्यवस्था होगी और काम शुरू होगा। - नारायण सिंह, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी
किला पुल की मरम्मत जल्द नहीं हुई तो यह करीब एक साल बाद चलने लायक नहीं बचेगा। मरम्मत होने से इस पुल की मियाद लगभग दस साल बढ़ जाएगी। पीडब्ल्यूडी को यह अवगत करा दिया गया है। - वीके सेन, डीपीएम सेतु निगम