बरेली। सरकार की ओर से खेल व खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर सब धड़ाम नजर आते हैं। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग ले चुकी एथलीट के पास जूते खरीदने तक के लिए रुपये नहीं हैं। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए जूते भी मांगने पड़ रहे हैं। आर्थिक तंगी से परेशान खिलाड़ी अच्छे दिनों का इंतजार कर रहे हैं।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय की एथलेटिक्स प्रतियोगिता का सोमवार को समापन हुआ। स्टेपल चेज में दूसरा स्थान हासिल करने वाली एथलीट खुशबू राजपूत ने नम आंखों से बताया कि इस स्पर्धा के लिए अच्छी गुणवत्ता के जूतों की जरूरत होती है। आर्थिक तंगी की वजह से दोस्त से जूते मांगकर प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। जूते फिट न होने की वजह से दौड़ते समय सिंथेटिक ट्रैक पर पकड़ नहीं बना सकीं। उन्हें दूसरे सथान से संतोष करना पड़ा।
विगत वर्ष खुशबू ने अंतर महाविद्यालयीय प्रतियोगिता में ही स्वर्ण पदक हासिल किया था। इस बार आर्थिक समस्या थी, इसलिए बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सकीं। खुशबू राष्ट्रीय और राज्य स्तर के मुकाबले भी खेल चुकी हैं। राज्य स्तर पर उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया था। उन्होंने बताया कि उनके पिता किसान हैं। इस वर्ष वह बीमार हुए तो इलाज में लाखों रुपये खर्च हो गए। आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी। ऐसे में अब उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ रहा है। वह न्यू खुसरो कॉलेज आंवला से बीए कर रही हैं। साथ ही, विश्वविद्यालय कैंपस में रहकर स्टेडियम में अभ्यास करती हैं।