बरेली। बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर में श्री राधा माधव संकीर्तन मंडल की ओर से आयोजित रासलीला में शनिवार को बर्बरीक शीश दान का मंचन किया गया। वृंदावन से आए डॉ. देवकीनंदन महाराज ने बताया कि भीम और हिडम्बा के पौत्र, घटोत्कच और अहिल्यावती (मोरबी) के पुत्र बर्बरीक ने देवताओं से शक्ति के रूप में तीन वाण प्राप्त किए और वचन दिया कि हमेशा हारे का सहारा बनेंगे।
जब कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध हुआ तो बर्बरीक भी वहां पहुंचे। भगवान श्रीकृष्ण ने रास्ते में रोककर उनसे पूछा कि किसकी ओर से युद्ध करोगे। तब बर्बरीक ने बताया कि जो सेना हारेगी, मैं उसकी ओर से युद्ध करूंगा और तीन बाण से युद्ध का परिणाम बदल दूंगा।
भगवान ने कहा कि क्या तुम अपने एक तीर से इस पेड़ के सारे पत्ते छेद सकते हो। बर्बरीक ने तुरंत एक तीर चला दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने एक पत्ता अपने पैर के नीचे दवा लिया था। जब पैर हटाकर देखा तो उस पत्ते में भी छेद हो गया था।
भगवान समझ गए कि यह युद्ध का परिणाम बदल देगा। इसलिए उन्होंने ब्राह्मण भेष धारण कर बर्बरीक से उसके शीश का दान मांगा। बर्बरीक ने अपने शीश का दान किया और साथ ही युद्ध देखने की इच्छा जताई। भगवान श्रीकृष्ण ने इसे स्वीकार कर लिया।
भगवान श्रीकृष्ण ने पहाड़ के शिखर पर बर्बरीक के शीश को रख दिया और वरदान दिया कि कलयुग में तुम्हें लोग श्याम खाटू के नाम से जानेंगे। युद्ध के बाद जब श्रेय लेने की होड़ मची तो निर्णय के लिए सभी बर्बरीक के पास गए। बर्बरीक ने बताया कि यह युद्ध श्री कृष्ण ने जीता है।
युद्ध के बाद बर्बरीक का सिर जल में प्रवाहित कर दिया गया जो खाटू धाम में आकर रुका। बाद में यहां भगवान खाटू श्याम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ। अंत में जयकारों के बीच आनंद उत्सव मनाया गया।
लीला में अनिल अग्रवाल, संजय गोयल, हरिश्चंद्र अग्रवाल, कैलाश बाबू जुगल किशोर साबू, मोहन गुप्ता, सुरेश मिन्ना, प्रेम शंकर अग्रवाल आदि का सहयोग रहा। मीडिया प्रभारी कैलाश चंद्र शर्मा ने बताया कि रविवार को श्री शिव-पार्वती विवाह की लीला का मंचन होगा। संवाद