बरेली। प्रतिबंध के बावजूद बहेड़ी में खनन के लिए अवैध ढंग से पोकलैंड मशीन का इस्तेमाल हो रहा था, जबकि खनन विभाग के पास इसका कोई रिकार्ड ही नहीं है कि जिले में किन लोगों के पास कितनी पोकलैंड हैं और उनका कब और कहां प्रयोग हो रहा है। बहेड़ी के अवैध खनन का मामला शासन तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने यह रिकार्ड मंगवाया है कि आरटीओ में पोकलैंड के कितने रजिस्ट्रेशन हैं। उनका कहां इस्तेमाल हो रहा है।
शासन से आई टीम ने बहेड़ी में मोहम्मदपुर और टियूला में खनन पट्टों की जांच की थी तो टीम यह देखकर दंग रह गई कि यहां प्रतिबंध के बावजूद पोकलैंड का इस्तेमाल हो रहा था। खनन में पोकलैंड मशीन के इस्तेमाल पर रोक है, लेकिन खनन विभाग के अधिकारियों के पास यह रिकार्ड ही नहीं कि जिले में किन लोगों के पास कितनी पोकलैंड मशीनें हैं और उनका कहां-कहां प्रयोग हो रहा है। प्रशासन इस पर ही मॉनीटरिंग रखता तो पोकलैंड से खनन पर काफी हद तक लगाम कसी जा सकती थी।
उधर, बहेड़ी में खनन का मामला शासन तक पहुंचने के बाद खनन विभाग ने बहेड़ी के दोनों पट्टों को निरस्त कर दिया है। अब अफसर यह जानकारी भी जुटा रहे हैं कि जिले में कितनी पोकलैंड मशीनों के रजिस्ट्रेशन आरटीओ के पास हैं। बताते हैं कि एक पोकलैंड मशीन की कीमत 40 से 50 लाख रुपये तक होती है। इसका एक दिन का आठ से दस हजार रुपये तक का किराया वसूला जाता है।
खनन विभाग के पास पोकलैंड मशीनों का रिकार्ड होना चाहिए। इसके लिए खनन अधिकारी से कह दिया गया है कि वह आरटीओ कार्यालय से इसका रिकार्ड मंगवा लें। कोशिश होगी कि इन पोकलैंड मशीनों के संचालन पर कड़ी निगरानी रखी जाए।
-मनोज कुमार पांडेय, एडीएम फाइनेंस