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आजम के विधायक बेटे के रिसोर्ट की दीवार ढहाई फिर यहां 17 कब्जेदारों की क्यों बचाई

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बरेली। रामपुर में सिंचाई विभाग ने अपनी जमीन खाली कराने को लेकर शुक्रवार को सपा सांसद आजम खां के विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम खां के रिसोर्ट पर बुलडोजर चला दिया, लेकिन शहर में नहरें कब्जाने वालों पर सभी मेहरबान हैं। पिछले दिनों हुई एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स की बैठक में नहर विभाग के अधिकारियों ने खुलासा किया कि शहर में 3.329 हेक्टेयर जमीन पर 17 लोगों का अवैध कब्जा है। इस पर अधिकारियों ने नहर विभाग को इन अवैध कब्जेदारों पर रिपोर्ट दर्ज कराने और गुंडा एक्ट की कार्रवाई कराने के निर्देश दिए, लेकिन अफसर मामले को दबाकर बैठ गए।
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वर्ष 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वाले भू-माफिया को चिह्नित कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। शासन का डंडा चला तो तत्कालीन अफसरों ने गांव-देहात के दस लोगों को चिह्नित कर भू-माफिया बना दिया। इस पर बवाल मचा तो यह सूची ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। अब नए सिरे से भू-माफिया चिह्नित करने की कवायद शुरू हुई, जो आज तक पूरी नहीं हो सकी है। इसके बाद सरकारी जमीनें कब्जाने वालों पर कार्रवाई के लिए एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स गठित कर दी गई, जिसमें राजस्व, पीडब्ल्यूडी, नहर समेत कई विभागों को शामिल किया गया। 23 जून को हुई मीटिंग में नहर विभाग के अफसरों ने इस बात का खुलासा किया कि शहरी क्षेत्र में उनकी 3.329 हेक्टेयर जमीन पर 17 लोगों के अवैध कब्जे हैं। इस पर डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने इन अवैध कब्जेदारों पर रिपोर्ट दर्ज कराने और गुंडा एक्ट की कार्रवाई कराने के निर्देश दिए, लेकिन नहर विभाग के अफसरों ने यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। वहीं शुक्रवार को रामपुर में विधायक अब्दुल्ला आजम खां के रिसोर्ट पर सिंचाई विभाग की कार्रवाई के बाद यहां के अफसरों पर सवाल उठ रहे हैं।

सड़क से दिखती नहर पर बना रास्ता कॉलोनी में गुम हो गया
पीलीभीत बाईपास पर फनसिटी के बराबर से एक बड़ी नहर पीरबहोड़ा, आशुतोष सिटी, धौरेरा माफी होकर आगे की ओर निकलती थी। लोगों ने बताया कि करीब 20 साल पहले इस नहर में पानी आता था, जब पानी आना बंद हुआ तो इस पर कब्जे शुरू हो गए। पीलीभीत रोड किनारे ही लोगों ने नहर को अवैध निर्माण करके दबा लिया। इससे फनसिटी के पीछे होकर आशुतोष सिटी और धौरेरा माफी के बीच जुड़ाव वाले स्थान पर जाकर नहर खत्म हो गई है। हालांकि नहर होने के निशान के तौर पर यहां पुराने समय की ईंटों की बनी पुलिया आज भी मौजूद है, जो मिट्टी से दब चुकी है। इससे करीब एक किलोमीटर आगे धौरेरा माफी की ओर नहर फिर पतले नाले के रूप में नजर आती है और धौरेरा माफी गांव में पहुंचकर खत्म हो जाती है। गांव वालों ने बताया कि सालों पहले नहर की गूल को पाटकर प्रधान ने खड़ंजा डलवा दिया था। इससे आगे शहर की नामचीन कॉलोनी है और कॉलोनाइजर ने दीवार बनाकर इस रास्ते को बंद कर दिया है।
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कार्रवाई के नाम पर गुमराह कर रहे हैं अफसर
पिछले दिनों हुई सख्ती के बाद अवैध कब्जेदारों पर नहर विभाग ने पीपी एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। पहले तो यह मामला श्रम विभाग भेजा गया, लेकिन फिर इसे ट्रांसफर कर दिया गया। अब यह मुकदमे कौन सी कोर्ट में चल रहे हैं, नहर विभाग के अफसरों को भी नहीं पता। इस बारे में जब नहर विभाग के एक्सईएन सुरेंद्र यादव से बात की गई तो उनका कहना था कि पीपी एक्ट के मुकदमे विचाराधीन होने के चलते ही अवैध कब्जा करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
जब रामपुर में सिंचाई विभाग की जमीन से कब्जा हटाया गया है तो यहां भी हटाया जाएगा। नहर विभाग की किसी भी जमीन पर कब्जे का मामला अफसर दबाकर नहीं बैठ सकेंगे, इसको लेकर पूरा सिस्टम तैयार किया जा रहा है।
- धर्मपाल सिंह, सिंचाई मंत्री

मैंने सिंचाई समेत कई विभागों को अवैध कब्जा करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन कुछ विभागों ने इसका अनुपालन नहीं किया है। जल्द ही बैठक बुलाकर इसकी समीक्षा की जाएगी और कार्रवाई कराई जाएगी।
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- वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम
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