बरेली। जिले में अवैध खनन भले ही बड़े पैमाने पर हो रहा हो लेकिन टास्क फोर्स की सुस्ती से ऐसे मामलों में कम ही कार्रवाई हो पा रही है। इस साल केवल अवैध खनन के 35 मामले पकड़े गए हैं। उसमें भी सिर्फ 9.62 लाख रुपये का जुर्माना हुआ है। यानी माफिया ने करोड़ों कमाए और कुछ लाख देकर बरी हो गए।
रामगंगा, किच्छा, पनघैली सहित जिले की तमाम नदियों से हर साल सैकड़ों-हजारों घनमीटर अवैध खनन होता है। इस कारोबार में शामिल माफिया से सरकारी मशीनरी से जुड़े लोग खूब मालामाल भी हो रहे हैं लेकिन खनन विभाग और प्रशासन की टीम कभी-कभार ट्रैक्टर पकड़ने और जुर्माने की कार्रवाई करके कोरम पूरा कर रही है। जबकि अवैध खनन रोकने के लिए जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स है। जबकि तहसील स्तर पर एसडीएम और सीओ को शामिल कर इस फोर्स का गठन किया गया है। जबकि इस फोर्स की तेजी न दिखाई देने से अवैध खनन पर शिकंजा नहीं कसा जा पा रहा। खनन विभाग के रिकार्ड के मुताबिक वर्ष 2018-19 में 77 अवैध खनन के 77 मामले पकड़े गए थे। इसमें 77 वाहन सीज हुए और 22,25,024 रुपये का जुर्माना लगाते हुए 33 लोगों पर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई हुई थी। जबकि इस साल वर्ष 2019-20 में अब तक अवैध खनन के 35 मामले पकड़े गए हैं। इसमें 9,62,564 रुपये का जुर्माना हुआ है। सिर्फ एक परिवाद दर्ज हुआ है।