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Bareilly News: 1857 में आज ही के दिन हुई थी खान बहादुर खान की ताजपोशी

Sat, 01 Jun 2024 05:43 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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बरेली। जंग-ए-आजादी में योगदान के लिए नवाब खान बहादुर खान को हमेशा याद किया जाएगा। वर्ष 1857 में शहर में क्रांति की चिंगारी खान बहादुर खान की अगुवाई में भड़की थी। तब 10 माह पांच दिन तक बरेली अंग्रेजों के चंगुल से आजाद रहा था। एक जून को ही खान बहादुर खान को बरेली का नवाब बनाया गया था।
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वर्ष 1857 में मेरठ में हुई क्रांति की खबर बरेली पहुंची तो यहां का भी माहौल गरमा गया था। 30 मई की रात में नवाब खान बहादुर खान और मुंशी शोभाराम ने सूबेदार बख्त खां को गोपनीय पत्र भेजकर उनको बरेली में क्रांति का संचालक और संगठनकर्ता मनोनीत किया गया था। 31 मई को तड़के चार बजे ही क्रांतिकारियों ने कैप्टन ब्राउनली के बंगले को फूंक दिया था।
तोपखाना लाइन में सुबह 11 बजे एक तोप छूटी, जो क्रांति के प्रारंभ होने का संकेत थी। बरेली की सेना ने 68वीं पल्टन के अंग्रेज अधिकारियों को खदेड़ना और चुन-चुनकर मारना शुरू कर दिया। अंग्रेजों के तमाम आलेख और जरूरी कागजात जला दिए गए। इससे मुख्य बाजार में तहलका मच गया। ब्रिटिश व्यापारी एस्पीलन ने क्रांतिकारियों का विरोध किया तो उसे मौत के घाट उतार दिया गया। कई और अंग्रेज अधिकारी मारे गए। कई अफसर जान बचाकर नैनीताल की ओर भागने लगे। शाम पांच बजे शहर पर क्रांतिकारियों का अधिकार हो गया। स्वाधीनता का ध्वज फहराया गया।
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पहली जून को विजय जुलूस निकालते हुए क्रांतिकारी कोतवाली पहुंचे। वहां एक ऊंचे चबूतरे पर खान बहादुर खान की ताजपोशी कर उनको बरेली का नवाब घोषित किया गया। यहां नवाब खान बहादुर खान ने शोभाराम को दीवान व बख्त खां को सेनापति घोषित किया था। (जैसा नवाब खान बहादुर खान के आठवें वंशज नवाब लियाकत आली खान ने बताया)
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