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Bareilly News: घर की तरह सुरक्षित रखें अपना सोशल मीडिया खाता

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बरेली। हम अपने घर को मजबूत ताला लगाकर सुरक्षित रखते हैं। इसी तरह अपने सोशल मीडिया अकाउंट को भी सुरक्षित रखने की जरूरत है। इसके लिए जरूरी है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सीमित इस्तेमाल करें। कम से कम निजी जानकारी साझा करें। अकाउंट पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन लगाएं।
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एसएसपी अनुराग आर्य ने शनिवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से फ्यूचर विश्वविद्यालय में आयोजित पुलिस की पाठशाला में ये बातें कहीं। उन्होंने यातायात नियमों का पाठ भी पढ़ाया। कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों ने डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक किया।
एसएसपी ने कहा कि कोई कितना भी करीबी क्यों न हो, अपने किसी अकाउंट का पासवर्ड साझा न करें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रियल टाइम अपडेट न दें। कहीं जा रहे हैं तो लोकेशन के साथ फोटो टैग न करें। इसके जरिये अपराधी आपको ट्रेस कर सकते हैं। अकाउंट पर टू स्टेप वेरिफिकेशन होने से साइबर अपराधी उसमें सेंध नहीं लगा सकेंगे। पासवर्ड को याद रखें, डायरी में न लिखेंं। नाम, जन्मतिथि, माता-पिता के नाम पर आधारित आसान पासवर्ड न बनाएं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विवि के कुलाधिपति मुकेश गुप्ता ने की। संचालन डॉ. शिवांगी ने किया।
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हेलमेट लगाकर चलाएं दो पहिया वाहनएसएसपी ने कहा कि दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट जरूर लगाएं। ड्राइविंग लाइसेंस के बिना वाहन न चलाएं। अगर कार चला रहे हैं तो सीट बेल्ट लगाएं। युवा खुद जागरूक हों, साथ ही परिवार व दोस्तों को भी जागरूक करें। शराब पीकर वाहन नहीं चलाने की नसीहत दी। एसएसपी ने कहा कि सर्दी में अगर कोई व्यक्ति खुले में सोता दिखे, तो 112 नंबर पर सूचना दें। पुलिस उसे शेल्टर होम पहुंचाएगी। कामकाजी लड़कियों या महिलाओं को रात में डर लगे तो भी 112 उन्हें घर तक छोड़ने जाएगी।

पुलिस नहीं करती किसी को डिजिटल अरेस्ट
साइबर थाने के इंस्पेक्टर नीरज सिंह ने कहा कि सभी अकाउंट को सुरक्षित रखना चाहिए। इसमें जीमेल सबसे खास है, क्योंकि संपर्क, चैट, फोटो आदि इसमें स्टोर होता है। इसमें टू स्टेप वेरिफिकेशन जरूर लगाएं। फिलहाल, डिजिटल अरेस्ट के मामले ज्यादा आ रहे हैं। ऐसे में यह ध्यान रखें कि पुलिस किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। अगर कोई इस तरह से परेशान कर रहा है तो साइबर हेेल्पलाइन 1930 से सहायता ले सकते हैं।

सिम खरीदते समय भी रहें सावधान
इंस्पेक्टर नीरज सिंह ने कहा कि कई बार दुकानदार सिम कार्ड देने के दौरान खरीदार से जालसाजी कर लेते हैं। एक सिम देने के लिए दो बार बायोमीट्रिक लगवा लेते हैं। ऐसे में आपके आधार कार्ड से दो सिम भी जारी हो सकते हैं। उनका दुरुपयोग भी किया जा सकता है। आपके आधार से कितने सिम कार्ड लिए गए हैं? इसकी जानकारी टैफकॉप वेबसाइट से ली जा सकती है। साथ ही, लिंक नंबर को डिएक्टिवेट किया जा सकता है। इस दौरान प्रो-चांसलर दीप गुप्ता, प्रो-वीसी पंकज कुमार मिश्रा, टीएसआई देवेश कुमार उपस्थित रहे। संवाद

मेरठ-----.चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में कुछ अपनी कुछ पराई कहानी संग्रह का विम

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