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कटरी कांड : परमवीर समेत छह लोगों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई

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बरेली। फरीदपुर में रामगंगा पार गोविंदपुर गांव में कटरी की जमीन पर कब्जे को लेकर खूनी संघर्ष के मामले में पुलिस ने परमवीर पक्ष के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की है। दूसरे पक्ष हिस्ट्रीशीटर सुरेश पाल तोमर के खिलाफ भी गैंगस्टर की कार्रवाई की उम्मीद है। कटरी में जमीन पर कब्जे को लेकर सुरेश पाल सिंह तोमर और परमवीर पक्ष के बीच 11 जनवरी को खूनी संघर्ष में तीन लोगों की मौत हो गई थी। रामगंगा पार गोविंदपुर गांव में कटरी की करीब एक हजार बीघा जमीन को लेकर काफी समय से परमवीर और सुरेश पाल सिंह तोमर के बीच विवाद था। करीब पांच सौ बीघा जमीन पर परमवीर का कब्जा था। 11 जनवरी को परमवीर पक्ष के लोग यहां गन्ना काट रहे थे तभी सुरेश पाल सिंह तोमर असलाहधारियों के साथ पहुंचा था। दोनों पक्षों में जमकर हुई फायरिंग में सुरेश पाल सिंह तोमर के गोलू और परमवीर पक्ष के परमेंद्र, देवेंद्र की मौत हो गई थी। सुरेश पाल सिंह तोमर और परवीर समेत दोनों पक्षों के 22 लोग जेल में हैं। मूल रूप से चंडीगढ़ का निवासी परमवीर यहां फार्म हाउस बना कर रहता है। प्रभारी निरीक्षक फरीदपुर दया शंकर ने परमवीर सिंह, खचांची लाल शर्मा, रविंद्र यादव, विकल, सुरेंद्र सिंह और अनमोल के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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गैंगस्टर की कार्रवाई के बाद अब परमवीर और उसके गिरोह में शामिल अपराधियों की संपत्ति का आंकलन किया जाएगा। एसपी देहात राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि परमवीर समेत उसके गिरोह के पांच लोगों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की गई है। अब आरोपियों के खिलाफ समाज विरोधी क्रिया कलापों और अवैध तरीके से अर्जित की गई संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

आगरा के पाठक बंधु अब भी पुलिस पकड़ से बाहर
- हिस्ट्रीशीटर सुरेशपाल सिंह तोमर को फंडिंग करने वाले आगरा के पाठक बंधु सुभाष पाठक और वीरेंद्र पाठक अब भी पुलिस पकड़ के बाहर हैं। हालांकि, पाइक बंधुओं की अग्रिम जमानत याचिका पर भी कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कटरी में खूनी संघर्ष में तीन लोगों की मौत के बाद ही पाठक बंधुओं का नाम प्रकाश में आया था। पाठक बंधुओं की नजर भी कटरी की जमीन पर थी। ऐसे में वह जमीन पर कब्जे के लिए सुरेश पाल सिंह का साथ दे रहे थे। उसके लिए धन की फंडिंग का काम भी पाठक बंधु कर रहे थे। पाठक बंधु सत्ता पक्ष के एक नेता के करीबी हैं।
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खूनी संघर्ष के बाद शुरू हुई थी कटरी में जमीनों की पैमाइश
- खूनी संघर्ष में तीन लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने कटरी में सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त करने के लिए पैमाइश भी शुरू कराई थी। पैमाइश के दौरान यह भी सामने आया कि कई ग्रामीणों की जमीनों पर भी सुरेश पाल सिंह तोमर और परमवीर का कब्जा है। सैकड़ों बीघा सरकारी जमीनों पर भी अवैध कब्जा पाया गया था। सुरेश पाल सिंह तोमर और परमवीर सिंह के जेल जाने के बाद कई ग्रामीणों ने इनके खिलाफ जमीनों पर कब्जे भी की शिकायतें दर्ज कराई थीं। हालांकि, कटरी में जमीनों की पैमाइश का काम अभी पूरा नहीं हो सका है।
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