रामगंगा के घाट पर लगी श्रद्धालुओं की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
चौबारी मेले पर रही पाबंदी, नहीं सजी दुकानें, लोगों ने घरों में बाल्टी में गंगाजल डालकर किया स्नान
बरेली। कोरोना संक्रमण को देेखते हुए इस बार चौबारी मेला नहीं लगाया गया। मेला स्थल के आसपास पुलिस तैनात रही मगर कुछ श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचे और उन्होंने स्नान किया भी। हालांकि मेले पर पाबंदी के कारण इस बार हर साल की तरह दुकानें भी नहीं लग सकी। वहीं, लोगों ने घरों में बाल्टियों में गंगाजल डालकर स्नान करने के बाद दान पुण्य किया।
रविवार रात से ही मेला और स्नान वाली जगह पर पुलिस तैनात कर दी गई थी मगर सख्ती के बाद भी कुछ लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई। हालांकि, रामगंगा नदी में रोज नहाने वालों पर रोक नहीं थी। जिन गांवों से रामगंगा नदी गुजरती है, वहां लोगों ने तड़के ही स्नान कर लिया। पाबंदी के कारण पिछले बरसों की तरह दुकानें नहीं लग सकी। दूसरी ओर, घरों में लोगों ने बाल्टियों में गंगाजल डालकर स्नान किया। अग्नि पुराण में कहा गया है नहाते समय यदि हर-हर गंगे का उच्चारण किया जाए तो व्यक्ति को वही फल मिलता है जो गंगा नदी में स्नान से मिलता है। शाम तक चौबारी के आसपास सन्नाटा छा गया।
घर-घर मनाई गई देव दीवाली
स्कंद पुराण में कार्तिक महीना सब महीनों में श्रेष्ठ माना गया है। इस महीने में किया गया काम बरगद के पेड़ की तरह बढ़ता है। इस महीने में गंगा स्नान के बाद ब्राह्मण को भोजन कराकर दान करने से पुण्य मिलता है। शाम को घर-घर देव दीपावली मनाई गई। लोगों ने घरों में भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी के चित्र आगे पांच दीपक प्रज्ज्वलित करके पुण्य कमाया। कहा जाता है कि देव दीपावली पर विष्णु जी के चित्र के सामने पांच दीपक जलाने से दीवाली की पूजा जैसा फल प्राप्त होता है।
‘आज के दिन लोग भगवान शिव के मंदिर में भी दीपक जलाते हैं। शिवजी ने ही राक्षस के तीनों भाइयों का वध किया था।’
- पंडित राकेश पांडेय, ज्योतिषाचार्य