प्रशासन की चेतावनी को दरकिनार कर आगे बढ़ते रहे
प्रशासन लाउडस्पीकर से गोली चलाने की चेतावनी दे रहा था मगर हम पीछे नहीं हटे। लाठीचार्ज और चौकसी के बावजूद दोपहर 12 बजे काफी संख्या में कारसेवक नारेबाजी करते हुए विवादित परिसर में घुसने में कामयाब हो गए। गुंबद पर झंडा लगाया गया। शाम तक वहां झड़पें होती रहीं। कई कारसेवक घायल हुए। प्रशासन की बर्बर कार्रवाई के बाद भी हम कारसेवा करने के अपने मकसद में कामयाब हुए। दो नवंबर की कारसेवा के लिए हम लोग अयोध्या में रहकर ही रणनीति बनाते रहे। स्थानीय ग्रामीणों का भी सहयोग मिल रहा था। कई साथी कटरी के गांव में छिपकर रहे। उनके खाने पीने का इंतजाम स्थानीय लोगों ने किया था।
वर्दी में भी मिल गए थे सहयोगी
राकेश कुमार ने बताया कि 30 अक्तूबर और दो नवंबर 1990 को अयोध्या में प्रशासन की बर्बर कार्रवाई के बीच वर्दीधारी कई लोगों का सहयोग भी कारसेवकों को मिला था। कई पुलिस वाले लाठी चलाने से गुरेज कर रहे थे। कई जगह साथी कारसेवकों के पैर छूने पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान पीछे हट गए थे। कुछ मोर्चों पर हमने उन्हें खदेड़कर आगे बढ़ने का रास्ता बनाया।