जन्माष्टमी पर सजा बांके बिहारी मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
मंदिरों में आज जन्म लेंगे कृष्ण कन्हैया, मुख्य गेट पर लगेगी स्क्रीन, इस्कान मंदिर में निमंत्रण नहीं
बरेली। शहर में कृष्ण कन्हैया आज रात जन्म लेंगे। मंदिरों के मुख्य गेट दोपहर बाद से ही बंद हो जाएंगे। अंदर पुजारी भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार करके छप्पन भोग लगाएंगे। रात 12 बजे भगवान का जन्म होगा। कई हरि मंदिर और बांके बिहारी समेत कई मंदिरों ने कान्हा का जन्म फेसबुक के जरिए लाइव दिखाने की व्यवस्था की है। इसके अलावा मंदिर गेट के बाहर स्क्रीन भी लगाई गई है। ताकि लोग बाहर से अंदर का दृश्य देख सकें।
श्रीकृष्ण भगवान के मंदिर बांके बिहारी और हरि मंदिर में हर साल धूमधाम से कार्यक्रम होता है। रात 12 बजे भगवान के जन्म के समय हजारों लोगों की भीड़ मंदिर में होती है, लोग अपने बच्चों को कृष्ण कन्हैया के वेष में मंदिर में लाते हैं, लेकिन कोरोना महामारी को देखते हुए मंदिर समितियों ने ऐसा कोई भी आयोजन नहीं किया है, जिससे भीड़ जमा हो। दोनों मंदिरों के अलावा श्री त्रिबटीनाथ मंदिर में बड़ी स्क्रीन लगाई गई है। मंदिर में सोशल डिस्टेसिंग के तहत ही प्रवेश होगा। श्री त्रिबटीनाथ मंदिर का मुख्य गेट खुला रहेगा लेकिन मंदिर के द्वार बंद रहेंगे। पीलीभीत रोड स्थित इस्कान में मंदिर में इस बार भक्तों के प्रवेश नहीं दिया जाएगा। वहां मुख्य पुजारी ही भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार करेंगे और पूजा अर्चना करके रात को भगवान का जन्मोत्सव मनाएंगे।
सब कुछ मंदिर के अंदर ही होगा
श्री हरि मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित रमेश चंद्र तिवारी ने बताया कि हर साल वह और उनके साथ के पंडित ही भगवान का श्रृंगार करते हैं। इस बार कोरोना महामारी के चलते भक्तों का प्रवेश वर्जित रहेगा।
मंदिर में सामाजिक दूरी बनाकर ही मिलेगा प्रवेश
चुन्ना मियां मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित प्रमोद मिश्रा ने बताया कि हर साल स्कूली बच्चे राधा कृष्ण बनकर मंचन करते थे। इस बार ऐसा कुछ नहीं होगा। मंदिर को भी ज्यादा सजाया नहीं है। मंदिर में पांच-पांच लोगों को दर्शन के लिए प्रवेश दिया जाएगा।
इस्कान मंदिर में आन लाइन होगी महाआरती
पीलीभीत रोड स्थित इस्कान मंदिर में सभी कार्यक्रम पुजारी सम्पन्न करेंगे। कार्यक्रमों को देखने के लिए मंदिर समिति ने आन लाइन व्यवस्था की है। मंदिर गिरधर गोपाल खंडेलवाल ने बताया कि मंगला आरती सुबह साढ़े चार, गुरू पूजा साढ़े सात, छप्पन भोग दोपहर 12 बजे, कीर्तन शाम पांच बजे, महाभिषेक रात दस से 12, महाआरती रात 12 और रात एक बजे कार्यक्रम का समापन होगा। इस दौरान अन्य कार्यक्रम भी होंगे।