बरेली। पितृ पक्ष शुरू होते ही स्वर्ग सिधार चुके अपने बुजुर्गों का आशीर्वाद पाने के लिए ब्राह्मण भोज, कौवे को रोटी देने जैसे कई कर्मकांड शुरू हो जाते हैं। मगर इसके उलट यह विडंबना भी इसी समाज में दिखाई देती है कि तमाम लोगों के पास अपने जीवित बुजुर्गों के लिए न घर में जगह है न दिल में। नतीजा यह है कि तमाम ‘बागबां’ बुढ़ापे में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। किसी को बेटे-बहू ने धक्के मारकर बेघर कर दिया है, तो कोई दिन-रात के क्लेश से ऊबकर मन की शांति पाने के लिए परिवार छोड़कर यहां चला आया है। शुक्रवार को अमर उजाला ने वृद्धाश्रम में रह रहे ऐसे बुजुर्गों का दर्द साझा किया।
आधी रात को धक्के मारकर घर से निकाला
सीबीगंज स्लीपर रोड पर रहने वाली 62 वर्षीय विद्या गुप्ता के कहने के लिए तो तीन बेटे हैं फिर भी कोई एक बेटे के घर में भी अपनी मां को रखने के लिए जगह नहीं है। अमर उजाला से बातचीत में विद्या गुप्ता ने बताया कि बड़े बेटे और बहू ने मिलकर उनकी जिंदगी इस कदर नर्क बना दी कि आखिर में वृद्धाश्रम में ही गुजारा करने आना पड़ा। आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह 15 दिन पहले ही वृद्धाश्रम में आई हैं। आश्रम आने से पांच दिन पहले बड़ा बेटा सिर्फ चाय बनाने की बहस पर उनका गला घोंटने लगा। हाथ पकड़कर आधे कपड़ों में रात के समय घर से बाहर निकाल दिया। बताया कि इसके बाद वे पुलिस के पास गईं, वहां शिकायत की। पुलिस ने बेटे को लताड़ लगाई, लेकिन फिर दो दिन बाद वही सब शुरू हो गया। इसलिए वृद्धाश्रम चली आईं। कहा, बहू और बेटे अभद्र टिप्पणी करते थे, जो वे भूल नहीं पा रहीं। कहा, दो बेटियों के बाद बड़ा बेटा हुआ था। उसके जन्म पर खूब खर्चा किया, बेटे को दुलार किया, लेकिन जब उसी बेटे ने जिंदगी नर्क बना दी तो वे क्या करतीं। भीख मांगकर गुजर बसर करने से बेहतर वृद्धाश्रम लगा।
बुढ़ापे में बेटे ने किया विश्वासघात
बाग ब्रिगटान में रहने वाले दंपति रमेश जायसवाल और वंदना जायसवाल दोनों के ही भरोसे को बेटे ने चकनाचूर करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी। पिता रमेश ने बताया कि छोटे बेटे अमित जायसवाल ने पहले उन्हें भरोसे में लेकर घर का सौदा कराया। फिर बेघर होने के बाद जब वे बेटे के पास गए तो उन्होंने धक्के मारकर भगा दिया। कहा, कि बेटे की नियत में उन्हें पहले ही खोट नजर आ रही थी, लेकिन मोहवश उन्होंने बेटे की तरक्की के लिए घर का सौदा कर दिया, जो रुपये मिले उसे लेकर बेटा बहू के साथ नोएडा में शिफ्ट हो गया। बताया कि इस दौरान वे बड़े बेटे कपिल जायसवाल के घर पर रहने लगे, लेकिन जब रुपये छोटे ने लिए हैं तो बड़े बेटे पर बोझ क्यों बने। ये सोचकर वे छोटे बेटे के पास जा पहुंचे, लेकिन यहां उम्मीद तारतार हो गई। कहा, छोटे बेटे ने उन्हें घर से बाहर निकल जाने को कहा और खड़े रहने पर धक्के देकर बाहर निकालने की धमकी दी। लिहाजा, वे आंखों में आंसू लिए वहां से चले आए। बड़े बेटे की आर्थिक स्थिति खराब थी, इसलिए वृद्धाश्रम में ठिकाना बनाया।