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दिवाली पर जरा संभलकर रहें, गर्भवती व हृदयरोगी

Mon, 09 Nov 2015 01:44 AM IST
बरेली
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बरेली। दिवाली पर आपकी आतिशबाजी का धुआं और आवाज दूसरों को तकलीफ दे सकता है। अगर आपके आसपास कोई गर्भवती, बुजुर्ग या हृदयरोगी रहते हैं तो पटाखे जलाते समय सजग रहें। ऐसा न हो कि आपकी मस्ती किसी को सांस का रोगी बना दे। डॉक्टराें का कहना है कि धुएं और आवाज से इन्हें परेशानी हो सकती है। धुआं न केवल सांस का रोगी बनाता है बल्कि आंखों को भी नुकसान पहुंचाता है। त्वचा रोग और पर्यावरण के लिए भी यह खतरनाक है।
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ठहर जाता है धुआं, करता है नुकसान
पटाखों के धुएं में सक्सपेक्टेड पर्टीकुलेट मैटर यानी एसपीएम की मात्रा सबसे अधिक होती है। जिला अस्पताल के चेस्ट रोग फिजीशियन डॉ. वीके धस्माना बताते हैं कि तमाम हानिकारक रासायनिक तत्व ओस के चलते जमीन से कुछ ऊपर ही ठहर जाते हैं। सांस लेते समय ये नाक से फेफड़ों में पहुंचते हैं जो अंदर चिपक जाते हैं। यह सांस की दिक्कत, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, कान सुन्न, ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ाता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शशि गुप्ता कहती हैं कि गर्भवती महिलाआें के लिए यह धुआं और आवाज दोनों ही खतरनाक है।
पटाखा का धुआं क्याें खतरनाक
पटाखे में सल्फर डाई आक्साइड, नाइट्रोजन डाई आक्साइड, फास्फोरस, पोटैशियम डाई आक्साइड जैसे खतरनाक रासयनिक तत्व हैं। यह गैस में बदल जाते हैं जो नाक व मुंह के रास्ते शरीर में जाकर नुकसान पहुंचाते हैं।
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- आपके डॉगी न हो जाएं परेशान
पटाखों की आवाज से इंसान से ज्यादा परेशान जानवर होते हैं। अगर आपके घरों में भी पालतू जानवर हैं तो उन्हें दिवाली की रात बाहर न निकलने दें। ऐसी जगह रखें जहां आवाज कम आती हो। उन्हें आग से भी दूर रखें।
- ऐसे करें बचाव
दो से ढाई फीट की दूरी से पटाखे छुड़ाएं
अनार को माचिस से न जलाएं
ढीले कपड़े न पहने
बच्चों को निगरानी में पटाखे दें
तेज आवाज के पटाखे न जलाएं
पानी की बाल्टी पटाखों के स्थान पर रखें
- ये करें उपाय
आंखों में जलन होने पर ठंडे पानी से आंख धोएं
आंख को मसले नहीं
त्वचा जलने पर बर्फ रगड़ें
सांस के रोग मास्क लगाकर निकलें
कान में रूई लगा सकते हैं

दिवाली पर एक कॉल पर हाजिर हाेंगे डॉक्टर!
जिला अस्पताल में बर्न यूनिट है तैयार
बरेली। दिवाली की रात कोई अनहोनी न हो इसके लिए जिला अस्पताल प्रशासन ने भी कमर कस ली है। इमरजेंसी में मेडिकल ऑफिसर के साथ स्टॉफ नर्स मौजूद रहेंगी। दावा किया जा रहा है कि अन्य डॉक्टर ऑन काल हाजिर रहेंगे। जैसे ही चिकित्सकाें की जरूरत पड़ेगी पहले कैंपस के चिकित्सकाें को बुलाया जाएगा। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सक को फोन पर सूचना दी जाएगी।
रोशनी की रात में आतिशबाजी और अन्य कारणों से अनहोनी की आशंका ज्यादा रहती है। जिला अस्पताल में इसको लेकर अलर्ट जारी किया गया है। बर्न यूनिट में पर्याप्त बेड की व्यवस्था सुनिश्चित क र ली गई है। यहां दिवाली पर स्टॉफ नर्स की टीम मौजूद रहेगी। इमरजेंसी से शिफ्ट किए गए केस को सर्जरी के चिकित्सक देखेंगे। नेत्र रोग विशेषज्ञ की जरूरत पड़ने पर उन्हें बुलाया जाएगा। वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. डीपी शर्मा का कहना है कि दिवाली पर अगर कोई गंभीर केस आता है तो चिकित्सकाें को फोन कर बुलाया जाएगा। सबसे पहले कैंपस में रहने वाले चिकित्सकाें को सूचना दी जाएगी। वहीं बर्न यूनिट में शिफ्ट करने से पहले चिकित्सक उनका पूरा ट्रीटमेंट लिखकर स्टॉफ नर्स को देंगे।
- त्वचा रोग विशेषज्ञ न होने से दिक्कत
जिला अस्पताल में बर्न यूनिट तो तैयार हो गई लेकिन यहां त्वचा रोग विशेषज्ञ के न होने से मरीजाें को दिक्कत होगी। सर्जरी के चिकित्सक ही मरीजाें को देखेंगे। अगर स्थिति गंभीर हुई तो उसे रेफर भी किया जा सकता है।
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- इन चिकित्सकाें की पड़ेगी जरूरत
फिजीशियन, चेस्ट फिजीशियन, नेत्र विशेषज्ञ, सर्जरी, हृदय रोग विशेषज्ञ
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