बरेली। बिजली के निजीकरण को लेकर लखनऊ में हुई महापंचात में कर्मचारियों ने जेल भरने ऐलान किया है। वहीं जिले स्तर पर पदाधिकारियों ने जेल भरो आंदोलन और कार्य बहिष्कार दोनों की ही तैयारियाें के मुकम्मल होने का दावा किया है। लखनऊ में हुई महा पंचायत के बाद बरेली के जिम्मेदारों ने कहा है कि संगठन के शीर्ष नेतृत्व से जैसा आदेश आएगा वैसा ही किया जाएगा।
दरअसल पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण काे लेकर बिजली कर्मचारियों ने रविवार को लखनऊ में महापंचायत की थी। इस दौरान टेंडर जारी होते ही प्रदेश भर में जेल भरो आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी थी। इसमें तमाम विद्युत वितरण निगम के पदाधिकारी जिलेभर से शामिल हुए थे। इसके अलावा नौ जुलाई को देशभर के 27 लाख बिजली कर्मियों द्वारा राष्ट्रव्यापी सांकेतिक हड़ताल की भी रणनीती बनी है। इसके अलावा दाे जुलाई को देश भर में व्यापक विरोध भी करने का ऐलान हुआ है। इस मामले में जिले के पदाधिकारियों का कहना है कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वाधान में होने वाले हर आंदोलन में वह लोग शामिल रहेंगे।
निजीकरण से सिर्फ नुकसान : घिल्डियाल
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति मध्यांचल के संयोजक राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल ने कहा कि प्रबंधन पूर्वांचल और दक्षिणांचल के निजीकरण का टेंडर करने में विफल रहा है। वहीं अब निजीकरण पर जोर दिया जा रहा है, एक जगह भी इसका टेंडर होता है तो निश्चित तौर पर इसका नुकसान समय-समय पर भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हमारी तैयारियां पूरी हैं। अभियंता संघ के शाखा सचिव विपुल शुक्ला ने बताया कि अगर कार्य बहिष्कार के आदेश मिलेंगे तो वो भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आंदोलन में जिले के लगभग सभी स्थाई कर्मचारी शामिल हैं, जो निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के साथ हैं।