मशरूम की खेती के बारे में जानकारी हासिल करता एक ग्रामीण।
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कृषि विज्ञान केंद्र दे रहा किसानों और बेरोजगारों को कम लागत में अच्छी आमदनी के अवसर
बरेली। कोरोना काल में रोजी-रोटी के पैदा हो रहे संकट के बीच भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में कृषि विभाग केंद्र मशरूम की खेती में छिपे रोजगार के मंत्र दे रहा है, जिससे किसानों और बेरोजगारों को कम लागत में अच्छी आमदनी करने के पर्याप्त अवसर हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. रंजीत सिंह मशरूम की खेती को लेकर बताते हैं कि मशरूम बहुत ही पौष्टिक आहार है, इसमें लगभग सभी प्रकार के विटामिन, खनिज तत्व पाए जाते हैं। मशरूम में कार्बोहाइड्रेट व बसा का प्रतिशत न के बराबर होता है। इस कारण इसका मधुमेह रोगी व रक्तचाप रोगी भी सेवन कर सकते हैं। मशरूम का बीज किसी भी लैब से प्राप्त किया जा सकता है। मशरूम उगाने से पूर्व इसका प्रशिक्षण प्राप्त करना आवश्यक होता है। उसके बाद कार्य प्रारंभ करने से पूर्व किसी योग्य प्रशिक्षित कृषक अथवा विशेषज्ञ का सहयोग आवश्यक होता है। मशरूम में बिक्री अभी भी एक समस्या है, क्योंकि अधिकांश लोग मशरूम कैसे खाएं, यह जानते ही नहीं हैं। मशरूम से अनेक उत्पाद बनाए जाते हैं। जैसे सब्जी के रूप में विभिन्न व्यंजन बनाकर, मशरूम को सुखाकर उसका पाउडर बनाकर उसका ग्रेवी को गाढ़ा करने में प्रयोग किया जाता है।
सालभर की जा सकती है मशरूम की खेती
सामान्य रूप से 4 तरह का मशरूम अलग-अलग मौसम में उगाया जाता है। ठंडे मौसम में जब तापमान 18 से 25 डिग्री तक हो तो सफेद बटन मशरूम का उत्पादन किया जाता है। 20 से 28 डिग्री तापमान में धींगरी मशरूम उगाते हैं। धींगरी मशरूम में प्लूरोटन नामक एक रसायन होता है, जो कैंसर रोधी माना जाता है। इसको औषधीय मशरूम भी कह सकते हैं। गर्मी के मौसम में जब तापमान 30 से 40 डिग्री के बीच रहता है तब मिल्की मशरूम की खेती होती है। 45 डिग्री तापमान तक धान के पुआल का मशरूम उगाया जा सकता है। इस तरह सालभर मशरूम की खेती की जा सकती है।
चार से पांच महीने में 30 हजार तक की जा सकती है कमाई
वैज्ञानिक डॉ. रंजीत ने बताया कि मशरूम की खेती का प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केंद्र में भी दिया जाता है। 10 गुणा 12 फीट के आकार के कमरे में लगभग 5 से 6 क्विंटल तक मशरूम उगाया जा सकता है और 4 से 5 महीने में लगभग 25 से 30 हजार रुपये तक आमदनी संभव है। उनका कहना है कि इन दिनों ग्रामीणों के साथ बेरोजगार युवक भी इसकी ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। पीलीभीत के न्यूरिया, माधोटांडा क्षेत्र, बरेली के आंवला, फरीदपुर व बदायूं के बिनावर व दातागंज क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मशरूम की खेती शुरू हो चुकी है।