बरेली। करोड़ों रुपये के गंगा इन्फ्रासिटी ठगी प्रकरण के दो मुकदमों में नामजद होने बाद कुछ एजेंट दो साल बाद भी फरार हैं। ये लोग खुद को पीड़ित बताकर शासन और अधिकारियों से शिकायत करते घूम रहे हैं। क्राइम ब्रांच अब ऐसे ही दर्जन भर फरार एजेंट से सख्ती से निपटने के लिए दो और मुकदमे दर्ज कराने की तैयारी कर रही है, जिसके बाद कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।
वर्ष 2018 में थाना बारादरी में श्रीगंगा इन्फ्रासिटी के एमडी पीलीभीत बाईपास पर चंद्रगुप्तपुरम कालोनी निवासी राजेश मौर्य, एजेंट अजय मौर्य, मनोज मौर्य, दिनेश मौर्य, सिविल लांइस में वसुंधरा होटल के पीछे रहने वाले विश्वनाथ मौर्य, कृष्णनाथ मौर्य, शिवनाथ मौर्य और संदीप सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि सैकड़ों लोगों से कंपनी में करोड़ों रुपये निवेश कराने के बाद ये आरोपी फरार हो गए हैं। किसी को मोटा मुनाफा तो किसी को प्लाट देने के बहाने ठगी की गई थी। इस मामले में क्राइम ब्रांच ने तीन रिपोर्ट दर्ज की थीं। विवेचना के दौरान इन मुकदमों में करीब दर्जन भर ऐसे नाम आए जो इस ठगी में एजेंट बनकर काम कर रहे थे, पुलिस ने इनके नाम भी विवेचना में खोल दिए हैं। मगर इसके बाद यह सभी आरोपी फरार हो गए और शासन व उच्च अधिकारियों से शिकायत करके खुद को पीड़ित बता रहे हैं।
पिछले सप्ताह भी हुई एक रिपोर्ट
करोड़ों रुपये के इस फर्जीवाड़े में पिछले सप्ताह भी क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर रामनरेश माथुर ने ऐसे ही दस लोगों के खिलाफ थाना बारादरी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इनमें चंद्रगुप्तपुरम निवासी रीना शाक्य, मेरठ में एकतानगर पल्लवपुरम निवासी आदित्य कुमार, प्रेमनगर के शास्त्रीनगर निवासी इकराम मौर्य, उसकी पत्नी मिथलेश, बदायूं में शेखूपुर निवासी मोहनलाल मौर्य, बारादरी की सैनिक कालोनी निवासी गंगाराम मौर्य, बिहारीपुर निवासी कमल श्रीवास्तव, रोहली टोला निवासी संजीव गुप्ता, चौधरी तालाब निवासी शमी उर्फ शमीम अहमद, आकाशपुरम निवासी राजीव पाठक शामिल हैं। अब क्राइम ब्रांच इन समेत करीब दर्जन भर एजेंट के खिलाफ दो और मुकदमे दर्ज कराकर कुर्की की तैयारी कर रही है। यह सभी लगभग दो साल से फरार हैं।