भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान में 125वें स्थापना दिवस पर डाक विशेष कवर आवरण जारी किया गया। इसमें 800 लिफाफे जारी किए गए। इसमें 25 चीफ पोस्ट मास्टर जनरल के यहां लखनऊ फिलैटली विभाग में, 575 आईवीआरआई के म्यूजियम में और 200 लिफाफे बरेली डाक विभाग के फिलैटली विभाग को दिए गए हैं। इसकी खासियत इसमें लगी सील, जिसमें आईबीएल मुक्तेश्वर का प्राचीनतम सूक्ष्मदर्शी का फोटो है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी संजय कुमार, विशिष्ट अतिथि पोस्टर मास्टर जनरल बरेली एमएल कालिया और निदेशक एवं कुलपति प्रो. आरपी सिंह ने यह विशेष डाक कवर आवरण जारी किया। डीएम संजय कुमार ने कहा कि यह दिन ऐतिहासिक महत्व का है। उन्होंने कहा कि पशुओं की रिंडरपेस्ट की बीमारी का उन्मूलन भी इस संस्थान की ओर से किया गया। इस काम के लिए आईवीआरआई विश्व में विशेष पहचान रखता है। पशुपालन कृषि के बाद जीवकोपार्जन महत्वपूर्ण साधन है। बोले, पशु चिकित्सकों की अहमियत तब पता चलती है, ऐसी जरूरत पड़ती है। उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक पशु चिकित्सक है। वह लखनऊ बैठते हैं। कोई समस्या होती है तो उनको लखनऊ से बाहर बुलाना पड़ता है। पोस्ट मास्टर जनरल एमएल कालिया ने कहा कि डाक विभाग हर साल किसी भी संस्था या विशेष अवसर पर एक डाक टिकट जारी करता है। उसी शृंखला में यह एक काम है। उन्होंने कहा कि जो पोस्टल कवर जारी किया गया है, इसमें जिलाधिकारी संजय कुमार की खास पहल है। निदेशक एवं कुलपति प्रो. आरके सिंह ने बताया कि इसके बाद संस्थान के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान में चिड़िया घर स्थापित करने के लिए वह भी प्रयासरत हैं। इस मौके पर रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के कुलपति एवं उप महानिदेशक डॉ. अरविंद कुमार, संयुक्त निदेशक डॉ. वीपी सिंह, डॉ. वीपी मिश्रा, नेशनल प्रोफेसर डॉ. डीएन कामरा आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन निदेशक के वैज्ञानिक सलाहकार सत्यवीर सिंह मलिक, संचार केंद्र प्रभारी कुंदन सिंह ने किया।
विदेशी भी भारत को आशा की नजरों से देख रहे
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के 125वें स्थापना दिवस समारोह के अंतिम दिन रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के कुलपति एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक शिक्षा डॉ. अरविंद कुमार ने व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि 125वें स्थापना दिवस पर प्रकाशित इंडियन फॉर्मिंग के विशेष आईवीआरआई अंक और पशु पोषण विभाग की ओर से प्रकाशित पुस्तक न्यृट्रीशनल माइक्रोबायोलॉजी रिसर्च ऐट आईवीआरआई का विमोचन किया गया। उन्होंने संस्थान में कार्यरत वरिष्ठ शोध अध्येताओं के मानदेय में वृद्धि की घोषणा भी की।
उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि अब विदेशी लोग भारत को आशा की नजरों से देख रहे हैं। बोले, कृषि एवं पशुपालन में चार फीसदी बढ़ोत्तरी का अनुमान किया गया था, लेकिन यह 4.1 फीसदी रहा। भारत ने आयात-निर्यात में भी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने कहा कि अगले 10 सालों में पेयजल की समस्या आने वाली है। वातावरण में प्रदूषण की कमी करने के लिए विभिन्न तरह के निषेध लागू करना होगा। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक एवं कुलपति के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. एसवीएस मलिक भी मौजूद रहे।