पशु संबंधी वैक्सीन का क्वालिटी टेस्ट करते हैं वैज्ञानिक
संस्थान में वर्ष 1969 में जैविक मानकीकरण विभाग स्थापित हुआ, जो वैक्सीन क्वालिटी कंट्रोल का कार्य कर रहा है। यहां उन्हीं वैक्सीन की जांच होती है, जो राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम में इस्तेमाल की जाती हैं। कई नैदानिकी का भी यहां टेस्ट होता है। पशु पोषण विभाग देशभर के चिड़ियाघरों में जानवरों को दिए जाने वाला आहार की जांच कर सुझाव देता है। वन्यजीव प्राणी संस्थान, चिड़ियाघर समेत सफारी, टाइगर रिजर्व, रेस्क्यू सेंटर के जरिये पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल करता है।
अब तक की प्रमुख उपलब्धियां
- रिंडरपेस्ट बीमारी का उन्मूलन, एफएमडी वैक्सीन का विकास।
- पशुओं की टूटी हड्डी जोड़ने की तकनीक का विकास।
- फ्रैक्चर के इलाज के लिए स्टेम सेल चिकित्सा पद्धति का प्रयोग।
- उन्नत बोन फिक्सेटर तकनीक, लंपी डिजीज की वैक्सीन व अन्य।
- 34 पेटेंट, 26 डिजाइन, 46 कॉपीराइट पंजीकृत।
- 160 उद्योग को 47 तकनीकियों का व्यवसायीकरण।
- 43 शैक्षणिक वीडियो, 6 पॉडकास्ट, 21 मोबाइल एप, 3 चैटबोट एप।
- ऑनलाइन पशु चिकित्सा क्लीनिक, टेली कन्सलटेंसी सर्विस संचालित।
इतिहास
- 1889 : इम्पीरियल बैक्टीरियोलॉजिकल लेबोरेटरी (आईबीएल) पुणे में स्थापित।
- 1893 : आईबीएल लैब मुक्तेश्वर कुमाऊं हिल्स उत्तराखंड में शिफ्ट।
- 1913 : आईवीआरआई की स्थापना इज्जतनगर बरेली में।
- 1940 : पोल्ट्री में रानीखेत बीमारी रोकने के लिए पहली वैक्सीन बनी।
- 1947 : निदेशालय मुक्तेश्वर से आईवीआरआई इज्जतनगर में शिफ्ट।
- 1971 : आईवीआरआई के बंगलूरू परिसर की स्थापना।
अनुवांशिक विकास से विकसित की वृंदावनी गाय और लैंडली सूकर
पशुधन के अनुवांशिक विकास पर अनुसंधान से वैज्ञानिकों ने वृंदावनी गाय, लैंडली सूकर विकसित किया। रुहेलखंडी गाय, रुहेलखंडी बकरी, घुर्रा सूकर को चिह्नित कर राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत कराया है। पशुधन उत्पाद में चिकन नगेट्स, चिकन उत्पाद, मांस उत्पाद, प्रीमियम चिकन सूप और मिल्क चिप्स तैयार किया है। ए-2 मिल्क से आइसक्रीम, पनीर, मट्ठा, घी आदि तैयार कर संस्थान में बिक्री कर रहे हैं।