बरेली। रामगंगानगर सेक्टर-11 में ट्रांसफार्मर से तांबा, पीतल, कॉपर और तेल सारा सामान चोरी हो गया। सिर्फ ढांचा ही बचा है। जहां यह वारदात हुई, वहां एक भी मकान नहीं हैं। सन्नाटा पसरा रहता है। टूटी हुई सड़क के बीच में ही ट्रांसफार्मर को लावारिस छोड़ दिया गया था। बीडीए और विद्युत निगम के अफसर मामले को दो दिन तक दबाए रहे। अब दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं।
जिम्मेदारों ने न तो पुलिस को मामले की सूचना दी, न ही अपने स्तर से कोई कार्रवाई की। विद्युत निगम ने हैंडओवर न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। बीडीए के अधिकारियों का कहना है कि अगर ट्रांसफार्मर विद्युत निगम को हैंडओवर नहीं किया गया है तो ठेकेदार को कार्रवाई करानी चाहिए। जरूरत नहीं होने के बावजूद वहां ट्रांसफार्मर रखे जाने पर सवाल भी उठ रहे हैं। अफसर इसका जवाब तक नहीं दे पा रहे हैं। रामगंगानगर आवासीय योजना में कागजों पर सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं, लेकिन हकीकत में वहां एक गार्ड भी नहीं दिखता। संवाद
वर्जन
बीडीए ने अभी ट्रांसफार्मर हैंडओवर नहीं किया है। इसलिए चोरी की घटना में बीडीए की ओर से ही कार्रवाई बनती है। - सुरेंद्र गौतम, एक्सईएन (11केवी वर्टिकल)
ट्रांसफार्मर अगर विद्युत निगम को हस्तांतरित नहीं हुआ है तो ठेकेदार की जिम्मेदारी बनती है। उसे कार्रवाई करानी चाहिए। - योगेंद्र कुमार, एक्सईएन बीडीए