बरेली। बाकरगंज से कूड़े का पहाड़ हटने में डेढ़ साल और लग सकते हैं। आसपास रहने वाली तीस हजार से अधिक आबादी को तब तक बदबू झेलनी पड़ेगी। पार्षदों ने महापौर के सामने शुक्रवार को नगर निगम की बैठक में यह मुद्दा उठाया था। मौके की स्थिति दिखवाने की मांग की थी। महापौर की सहमति से सदन में ही तय हुआ था कि पर्यावरण अभियंता पार्षदों को संग लेकर जाएंगे।
सदन के निर्णय पर पार्षद राजेश अग्रवाल, गौरव सक्सेना और इकबाल अहमद अंसारी बाकरगंज पहुंचे। दो घंटे में पार्षदों ने कूड़ा निस्तारण की पूरी प्रक्रिया को समझा। यह भी पूछा कि बाकरगंज क्षेत्र कब तक इस कूड़े के पहाड़ से मुक्त होगा? पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी ने उन्हें बताया कि फिलहाल एक दिन में 1700 मीट्रिक टन कूड़ा निस्तारण की क्षमता है। इसे बढ़ाकर 2500 मीट्रिक टन प्रतिदिन करने की तैयारी है। प्लांट 24 घंटे काम करेगा। यदि 2500 मीट्रिक टन कूड़ा रोज निस्तारित होता है तो इसमें करीब डेढ़ साल लग जाएंगे। इस पर पार्षदों ने प्लांट की क्षमता बढ़ाए जाने पर जोर दिया।
सर्दी में 700 मीट्रिक टन कम हो रहा कूड़ा निस्तारण
बाकरगंज में करीब 14 लाख मीट्रिक टन कूड़ा होने का अनुमान है। पहले चरण में 5.75 लाख मीट्रिक टन और दूसरे 7.8 लाख मीट्रिक टन कूड़ा निस्तारित किया जाना है। पहला चरण जुलाई 2021 में शुरू हुआ था जो मई 2025 में पूरा होगा। प्रतिदिन करीब 500 मीट्रिक कूड़ा आ रहा है और 1700 मीट्रिक टन निस्तारित करने की क्षमता है, लेकिन प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल पाता। सदी और बारिश के दिनों में कूड़ा निस्तारण की रफ्तार घट जाती है। इस समय रोज 1000 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण हो पा रहा है।
पार्षदों ने दिए ये सुझाव
- बाकरगंज में प्रतिदिन पहुंचने वाले 500 मीट्रिन टन कूड़े का निस्तारण किसी और स्थान पर कराया जाए।
- कूड़ा निस्तारण की क्षमता बढ़ाई जाए।
- सथरापुर में 24.18 करोड़ रुपये की लागत से तैयार सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट चालू कराया जाए।
प्लांट 24 घंटे चलता है। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। 500 मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़कर क्षमता 1700 मीट्रिक टन रोजाना तक पहुंच गई है। इसे और बढ़ाएंंगे। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
अमर उजाला ब्यूरो