नवाबगंज (बरेली)। अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षरों का दुरुपयोग कर फर्जी आय, जाति और मूल निवास प्रमाणपत्र बनाने के आरोप में गिरफ्तार दो युवकों को कोर्ट ने शुक्रवार को जेल भेजा है। उनके खिलाफ दर्ज रिपोर्ट में शनिवार को आईटी एक्ट (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम) की धाराएं बढ़ाई गई हैं।
पुलिस ने शुक्रवार को जनसुविधा केंद्र संचालक नेमचंद और वहां काम करने वाले विजय कुमार को गिरफ्तार किया था। उनपर फर्जी प्रमाणपत्र बनाने का आरोप है। दरअसल, तत्कालीन तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह को एक जनसुविधा केंद्र पर फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद नायब तहसीलदार सत्यवीर सिंह को जांच के आदेश दिए गए। नायब तहसीलदार ने राजस्व टीम के साथ जनसुविधा केंद्र पर छापा मारा। जांच के दौरान कई फर्जी प्रमाणपत्र और एक लैपटॉप बरामद हुआ। बरामद प्रमाणपत्र फर्जी साबित हुए, जिन पर पूर्व में तैनात अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर थे। तत्कालीन तहसीलदार ने 24 सितंबर 2025 को नवाबगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने शुक्रवार को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। वहां से जेल भेजा गया है।
धारा के साथ विवेचक बदला
एसएसपी अनुराग आर्य ने इस मामले की आगे विवेचना की जिम्मेदारी अब नवाबगंज कोतवाली में तैनात अपराध निरीक्षक लव सिरोही को दी है। इससे पहले चौकी इंचार्ज सुनील कुमार इसकी जांच कर रहे थे। एसएसपी ने बताया कि जांच में आईटी एक्ट की धाराएं बढ़ाई गई हैं इसलिए अब इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी ही विवेचना कर सकेंगे। आरोपियों से बरामद लैपटॉप को लैब भेजा जाएगा।