बरेली। ईरान-इस्राइल युद्ध का असर शहर के कारोबार पर पड़ रहा है। ईरानी छुआरा, खजूर, किशमिश हमारी पहुंच से दूर हो रहे हैं। मेवा कारोबारी संजय आनंद के मुताबिक बरेली में ईरानी मेवे की मांग सर्वाधिक है, पर युद्ध से आयात प्रभावित होने लगा है। ऐसे में इनकी कीमतें बढ़ने की आशंका है। यहां से खाड़ी देशों को निर्यात हो रहे जरी-जरदोजी, मेंथॉल, मीट व अन्य उत्पादों की मांग में गिरावट की आशंका है।
पिछले सप्ताह युद्ध की शुरुआत के साथ ही औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारियों के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था। सराफा कारोबारी संजीव औतार अग्रवाल के मुताबिक, युद्ध का सर्वाधिक असर सोने की खरीद पर पड़ता है। असमंजस की स्थिति में सुरक्षित निवेश का जरिया होने से इसकी खरीद बढ़ जाती है। बीते दिनों कीमतों में उछाल के बाद एक लाख रुपये के करीब पहुंच रहा सोने का भाव फिलहाल स्थिर है, लेकिन युद्ध की वजह से इसमें बदलाव हो सकता है।
कमोडिटी व शेयर बाजार में भी उतार-चढ़ाव का दौर शुरू हो गया है। वरिष्ठ उद्यमी सुरेश सुंदरानी के मुताबिक, बरेली से जरी-जरदोजी, मेंथाॅल, मीट आदि का निर्यात खाड़ी देशों को होता है। युद्ध जल्द न थमा तो इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ेगा।
खाड़ी देशों को किया जाता है चावल का निर्यात
कारोबारियों के मुताबिक, खाड़ी देशों में बरेली मंडल से चावल का निर्यात होता है। युद्ध की विभीषिका से चावल कारोबारी असमंजस में हैं। उनके मुताबिक, बीते दिनों ट्रंप टैरिफ के चलते मांग प्रभावित होने से बाजार उभर नहीं पाया था। इधर, युद्ध शुरू होने से मांग में गिरावट की आशंका है।