अमर उजाला की पड़ताल में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, अस्पतालों का डेथ सर्टिफिकेट पोर्टल पर नहीं है अपलोड
बरेली। कोरोना से हो रही मौतों के आंकड़ों में भी सिस्टम बाजीगरी करने से बाज नहीं आ रहा है। अमर उजाला की पड़ताल में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जो सिस्टम के दावों की पोल खोल रहे हैं। होम आइसोलेशन में रह रहे कई संक्रमितों की मौत के बाद दसवा-तेरहवीं भी हो चुकी है, लेकिन कोविड कमांड सेंटर के रिकॉर्ड में वे आज भी जीवित हैं। श्मशान भूमि के रजिस्टर में दर्ज कोविड मृतकों के पते पर उनके परिजन से संपर्क किया तो मौत के आंकड़ों का सच सामने आया।
होम आइसोलेशन पर रह रहे मरीजों के फॉलोअप और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में बेहतर काम करने का दावा कर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से तमगा हासिल करने वाले प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अब श्मशान भूमि के रजिस्टर ने कटघरे में खड़ा कर दिया है। दरसल, कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में तमाम मरीजों की सांसें थमीं, मगर स्वास्थ्य विभाग ने अब तक सिर्फ 121 लोगों की ही मौत दर्ज की है। उधर, गुुलाबबाड़ी, संजयनगर, गिरधारीपुर और सिटी श्मशान भूमि में औसतन हर दिन करीब दो दर्जन से ज्यादा कोविड संक्रमितों की अंत्येष्टि की गई। मौत का आंकड़ा कम दिखाने पर संक्रमितों की निगरानी करने वाले तंत्र पर भी सवालिया निशान लगा तो अफसरों ने होम आइसोलेशन के मरीजों के फॉलोअप का निर्देश दे दिया लेकिन अब तक एक भी मौत नहीं दर्ज की गई है।
मामले की गंभीरता देखते हुए अमर उजाला की टीम ने श्मशान भूमि के रजिस्टर में कोविड से हुई मौतों का रिकॉर्ड खंगाला। परिजनों के मोबाइल नंबर लेकर उनसे संपर्क किया। कोविड से ही मौत हुई है, इसकी पुष्टि के लिए उनसे पॉजिटिव की रिपोर्ट ली। अस्पताल में हुई मौत का डेथ सर्टिफिकेट भी लिया। पहचान छिपाकर कोविड कमांड सेंटर पहुंचे और मरीज के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि सभी जिंदा हैं और स्वस्थ हैं।
मौत दर्ज कराने के लिए भटक रहे हैं परिजन
होम आइसोलेशन पर रहे एक मरीज की पिछले दिनों मौत हो गई थी। सरकारी आंकड़ों में मौत दर्ज है या नहीं इसकी जानकारी लेने परिजन कलक्ट्रेट स्थित कोविड कमांड सेंटर पहुंचे। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर परिजन ने बताया कि कंट्रोल सेंटर पर जीवित होने की जानकारी दर्ज है। मौत दर्ज कराने के लिए आईडीएसपी सेल भेजा गया। आईडीएसपी सेल पहुंचे तो वहां कहा गया कि चूंकि मौत निजी अस्पताल में हुई है, लिहाजा अस्पताल प्रबंधन ही पोर्टल पर मौत दर्ज कर सकता है। परिजन ने मुख्यमंत्री से प्रकरण की शिकायत करने की बात कही है।
35 हजार से ज्यादा मरीजों का होम आइसोलेशन ओवर
कोविड कमांड सेंटर की ओर से जारी दैनिक मॉनीटरिंग रिपोर्ट का दावा है कि कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर में होम आइसोलेशन पर रहे एक भी मरीज की मौत नहीं हुई। करीब साल भर में 35944 लोग होम आइसोलेशन पर रहे, इनमें से 35230 लोगों का होम आइसोलेशन ओवर भी हो चुका है यानी वे सभी स्वस्थ हो गए हैं।
फॉलोअप, रैपिड रिस्पॉन्स टीम, निगरानी समिति फेल
होम आइसोलेशन का विकल्प चुनने पर मरीजों की निगरानी कलक्ट्रेट स्थित कोविड कमांड सेंटर से होती है। जो आरआरटी यानी रैपिड रिस्पॉन्स टीम को सक्रिय करते हैं। निगरानी समितियों के जरिए मरीज की निगरानी की जाती है। नियमानुसार यही प्रक्रिया अमल में लाई जाती है। तमाम सक्रियता के बावजूद होम आइसोलेशन पर हुई मौत को दर्ज न करने में लापरवाही तीनों पर ही सवालिया निशान लगा रही है।
अस्पतालों ने भी पोर्टल पर नहीं दर्ज की मरीज की मौत
होम आइसोलेशन पर रह रहे मरीजों की हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें निजी अस्पतालों में लेकर पहुंचे। परिजन का आरोप है कि अस्पताल में उनसे इलाज का मनमाना बिल वसूल किया गया। अब मृतक की सूचना सरकारी आंकड़ों में दर्ज न होने पर वह भी हैरान है। पिछले दिनों सीएमओ ने निजी अस्पतालों को नोटिस जारी कर मौतों का आंकड़ा दर्ज करने को कहा था। इसके बाद महज एक अस्पताल ने सवा माह पहले हुई छह मौत दर्ज की है।
केस-1
प्रेमनगर चौराहा के रहने वाले 52 वर्षीय मुकेश कुमार 25 अप्रैल को पॉजिटिव मिले थे। परिजन ने बताया कि वह होम आइसोलेशन पर थे लेकिन चार मई को हालत बिगड़ी तो आननफानन उन्हें चौपुला चौराहा स्थित दीपमाला अस्पताल में भर्ती कराया गया। 15 मिनट बाद ही उनकी मौत हो गई। अस्पताल ने डेथ सर्टिफिकेट तो दिया, लेकिन कोविड से हुई मौत की रिपोर्ट पोर्टल पर अब तक अपडेट नहीं की गई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में वह स्वस्थ हैं।
केस-2
राजेंद्रनगर के रहने वाले 42 वर्षीय चिकित्सक डॉ. हरीश गंगवार ने तबीयत खराब होने पर 24 अप्रैल को प्रताप अस्पताल में जांच कराई। कोविड पॉजिटिव मिलने पर पहले होम आइसोलेशन का विकल्प चुना, लेकिन हालत बिगड़ने पर 26 अप्रैल को खुशलोक अस्पताल में भर्ती हुए। 11 मई को उनकी मौत हो गई। अस्पताल ने कोविड से मौत की पुष्टि की, लेकिन पोर्टल पर डाटा अपडेट नहीं किया। पोर्टल पर होम आइसोलेशन ओवर यानी उन्हें स्वस्थ बताया जा रहा है।
केस-3
महानगर के रहने वाले 61 वर्षीय अश्वनी सक्सेना 20 अप्रैल को कोविड पॉजिटिव मिले थे। परिजन ने बताया कि होम आइसोलेशन पर रहने के दौरान हालत बिगड़ने पर उन्हें रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। एंटीजन जांच में पॉजिटिव थे। आरटीपीसीआर सैंपल लिया गया, इसकी रिपोर्ट मौत के अगले दिन पॉजिटिव आई। अब तक कोविड से हुई मौत पोर्टल पर अपडेट नहीं हुई। पोर्टल पर अस्पताल में अभी भर्ती होने की जानकारी दर्ज है।
कोविड कमांड सेंटर से संक्रमितों का फॉलोअप होता है। अगर किसी मरीज को अस्पताल में शिफ्ट कराना है या उसकी मौत की सूचना मिलती है तो उसे आईडीएसपी सेल को दी जाती है, वही मरीज को शिफ्ट कराते हैं। अगर मौत हुई है तो जानकारी पोर्टल पर दर्ज करते हैं। अगर किसी मरीज की मौत होम आइसोलेशन या फिर निजी अस्पताल में हुई है, लेकिन पोर्टल पर दर्ज नहीं है तो इसकी वजह जिला सर्विलांस अधिकारी ही बता सकते हैं। - महेंद्र कुमार, एडीएम सिटी, नोडल अधिकारी इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर
जिनकी मौत हुई है, उनका कॉन्टैक्ट नंबर या जांच रिपोर्ट की डिटेल मिल जाए तो मरीज को खोजने में आसानी होगी। यह भी पता चलेगा कि आखिर मौत पोर्टल पर अपडेट करने में किस स्तर पर चूक हुई है। अगर अस्पताल ने मरीज की मौत पोर्टल पर अपडेट नहीं की है तो उनसे जवाब लेंगे। होम आइसोलेशन पर रहने के दौरान अगर किसी की मौत हुई है तो परिजन पॉजिटिव जांच रिपोर्ट, अस्पताल से मिले डेथ सर्टिफिकेट को उपलब्ध कराएं। ताकि जानकारी अपडेट की जा सके। - डॉ. रंजन गौतम, एसीएमओ, जिला सर्विलांस अधिकारी