बरेली। चश्मे की बिक्री बढ़ाने के लिए नेत्र जांच के नाम पर खेल कर रहे चश्माघरों की जांच स्वास्थ्य विभाग ने शुरू कर दी है। संचालकों को नोटिस थमाकर अभिलेख के साथ जवाब तलब किया गया है। भविष्य में बिना प्रशिक्षित ऑप्टोमेट्रिस्ट के जांच पर कार्रवाई को भी चेताया है।
शहर और देहात में नेत्र जांच के उपकरण दिखाकर लोगों की आंख चेक कर रहे चश्माघरों की हकीकत अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। मामले का संज्ञान लेकर जिलाधिकारी ने निर्देश जारी किए। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की है।
नोडल अधिकारी डिप्टी सीएमओ डॉ. लईक अंसारी ने नगर निगम के पीछे वाले गेट की रोड पर संचालित भारत ऑप्टिकल्स का निरीक्षण किया। नेत्र जांच कर रही महिला के पास ऑप्टोमेट्रिस्ट की डिग्री थी पर हेल्थ काउंसिल में पंजीकरण नहीं मिला। वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कार्यालय बुलाया था। बुधवार को बयान दर्ज किए।
वहीं, घंटाघर पर संचालित मून अस्पताल, गुड्डू व अन्य चश्माघरों के संचालकों को भी दस्तावेजों के साथ बुलाया है। डिप्टी सीएमओ के मुताबिक चश्माघर में दुकानदार लेंस की जांच कर सकता है लेकिन किसी की आंख को जांचकर संबंधित नंबर का चश्मा लगाने का परामर्श सिर्फ विशेषज्ञ दे सकते हैं। कहा कि औचक जांच में नियम विरुद्ध कार्य की पुष्टि पर कार्रवाई की जाएगी।