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International Tea Day: बीटेक-बीए पास... चाय की चुस्कियों में ढूंढा रोजगार, टी स्टॉल से शुरू किया स्टार्टअप

Tue, 21 May 2024 11:25 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

काम छोटा या बड़ा नहीं होता। यह मानना है बीटेक पास पारस तोमर का। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया, लेकिन नौकरी करने की बजाय टी स्टॉल से स्टार्टअप शुरू किया। इसी तरह बीए पास चांदनी भी टी स्टॉल चलाती हैं। इनके यहां 12 तरह की चाय मिलती हैं। 
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टी स्टॉल पर चाय बनाते पारस और चांदनी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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भीषण गर्मी में भी बरेली के प्रमुख टी स्टॉलों पर सुबह से शाम तक कतार लगी रहती है। वहीं, सर्दी में यहां आलम ही कुछ और होता है। अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर हम आपको शहर के कुछ ऐसे ही युवाओं से रूबरू करा रहे हैं, जो चाय की चुस्की के साथ अपने सपनों को उड़ान दे रहे हैं।

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सलेक्शन प्वॉइंट चौराहा के पास बीटेक पासआउट पारस तोमर चाय बेचते हैं। वह बताते हैं कि बीटेक के बाद एक साल नौकरी की। उसके बाद स्टार्टअप करने का विचार आया। अपने शहर में टी स्टॉल खोलने की बात परिवार को बताई तो थोड़ा विरोध हुआ। 

पारस के पिता सरकारी अधिकारी रहे हैं। ऐसे में जान-पहचान वालों को भी असहज महसूस हुआ। घर से दूर स्टॉल लगाया। अब लोगों को चाय का जायका खूब पसंद आ रहा है। पारस ने बंगलूरू से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। उनका मानना है कि काम छोटा या बड़ा नहीं होता। इस काम में खर्च और रिस्क दोनों कम हैं।   

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12 प्रकार की चाय की ले सकते हैं चुस्की 
चांदनी सिंह झूलेलाल द्वार के पास फुटपाथ पर टी स्टॉल लगाती हैं। उनके स्टॉल पर देर शाम तक लोगों की भीड़ लगी रहती है। उनकी दुकान पर चाय के 12 प्रकार के फ्लेवर मिलते हैं, जिसमें गुलाब, मसाला, स्पेशल चाय आदि शामिल हैं। दूर-दूर से यहां शाम को अपनों के साथ लोग चाय की चुस्की लेने आते हैं। चांदनी ने बीए तक की पढ़ाई की है। उन्होंने आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने के लिए चाय की दुकान शुरू की। यहां लोगों का हुजूम देखकर उन्हें काफी खुशी होती है। उनके काम में पति भी हाथ बंटाते हैं।
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पिता से सीखा हुनर 
पुराने शहर की गलियों में इमरान की दुकान अपने स्वाद के लिए मशहूर है। 35 साल पुरानी दुकान की शुरुआत उनके पिता निसार ने शुरू की थी। पिता के साथ की स्मृतियां साझा करते हुए इमरान बताते हैं कि उन्होंने दो रुपये से चाय बेचना शुरू किया था। अब कीमत भले ही 10 रुपये हो गई हो, लेकिन स्वाद नहीं बदला है। वह बताते हैं कि पिता से उन्होंने चाय बनाने का हुनर सीखा था। इसलिए सुबह से लेकर शाम तक लोग चाय पीने और गपशप करने के लिए दुकान का रुख करते हैं।
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