नौकरी से निकाला गया तो शुरू कर दिया फर्जीवाड़ा
एसपी उत्तरी मुकेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि मोहम्मद फहीम 2012 से 2019 तक और 2023 से 2024 तक बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में आधार कार्ड बनाने का काम करता था, वहां उसे 10,500 रुपये वेतन मिलता था। इसके बाद एक नए आधार कार्ड पर 18 रुपये और अपग्रेड पर 13 रुपये कमीशन मिलने लगा। यह लोग आधार कार्ड बनाने के अलग से 100 रुपये ले लगे। इसकी किसी ने यूआईडीएआई (यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) में शिकायत कर दी, इसपर इसे निलंबित कर दिया गया।
निलंबित होने के बाद फहीम ने अपना आधार कार्ड जनसेवा केंद्र खोल लिया, जहां उसने जियाउल मुस्तफा को भी साथ रख लिया। फिर दोनों मिलकर फर्जी डॉक्यूमेंट बनाने का काम करने लगे। इससे ये लोग हर महीने लाखों रुपये कमाते थे। जियाउल मुस्तफा ने इंटर के बाद नीट की तैयारी की थी। पिछले छह महीने से वह जनसेवा केंद्र चला रहा था, जबकि मोहम्मद फहीम हाईस्कूल पास है।
इजिप्ट-तुर्किये से डोमेन लेकर बनाते थे आधार कार्ड
पुलिस के मुताबिक ये लोग इजिप्ट और तुर्किये से डोमेन लेकर एक वेबसाइट से एक बार में 100 रुपये का रिचार्ज करवाते हैं और उससे 10 आधार कार्ड तैयार करते हैं। एक आधार कार्ड की कीमत 1000 रुपये होती है। एक मिनट से भी कम समय में आधार कार्ड बनकर तैयार हो जाता है। ये कार्ड इतने असली लगते हैं कि असली और नकली का फर्क कर पाना मुश्किल होता है।
धंधेबाजों के साथियों का पता करेगी पुलिस : एसपी
एसपी उत्तरी मुकेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि इस केंद्र पर सभी तरह के फर्जी प्रमाणपत्र तैयार होते थे। पुलिस को जब सूचना मिली तो पुलिस ने दोनों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। इनके गिरोह में कोई और साथी होंगे तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।