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Bareilly News: हिदायत बेअसर, गर्भवतियों की जांच में पिछड़ रहे शहरी केंद्र

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बरेली। मातृ-शिशु मृत्युदर पर अंकुश लगाने की मुहिम को शहरी केंद्र पलीता लगा रहे हैं। जननी सुरक्षा योजना के तहत लक्ष्य के सापेक्ष गर्भवतियों की जांचें नहीं हो रहीं हैं। हिदायत के बाद भी सुधार नहीं दिख रहा। देहात के कई केंद्र 100 फीसदी के पार पहुंच रहे हैं। वहीं, शहरी केंद्र 36 फीसदी पर सिमटे हुए हैं।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से एंटीनेटल केयर जांच की एक अप्रैल से 27 जुलाई तक की जारी रिपोर्ट के अनुसार, आलमपुर जाफराबाद और मीरगंज ने निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 100 फीसदी से ज्यादा गर्भवतियों की जांचें कीं, जबकि बरेली के शहरी केंद्रों पर सिर्फ 35.99 फीसदी और बहेड़ी नगर पालिका के केंद्र पर 37.38 फीसदी जांचें हुईं। शहरी क्षेत्र के सीबीगंज, विश्वनाथपुरम, गंगापुर, सुभाषनगर, मढ़ीनाथ, जगतपुर, घेर जाफर खां केंद्र पर 50 फीसदी गर्भवतियों की जांचें की गईं हैं। स्वालेनगर, नदोसी, बाकरगंज, जाटवपुरा, संत नगर, बहेड़ी, सिविल लाइंस में 40 फीसदी से ज्यादा गर्भवतियों की जांचें कीं गईं। आंवला, मौलानगर, पीर बहोड़ा, इज्जतनगर, फरीदपुर, बानखाना, हजियापुर, शेर अली गौटिया, पुराना शहर, हरुनगला में यह आंकड़ा 20 फीसदी रहा। ब्यूरो


देहात में औसतन 66 फीसदी की हो रही जांच
रिपोर्ट के अनुसार, रामनगर, क्यारा, फरीदपुर, बिथरी चैनपुर में 80 फीसदी, भोजीपुरा, भुता, नवाबगंज, भदपुरा, फतेहगंज पश्चिमी, बहेड़ी, मझगवां, दमखोदा में 70 फीसदी, शेरगढ़, बहेड़ी में 60 फीसदी से ज्यादा गर्भवतियों की जांचें कीं गईं। बता दें कि स्वास्थ्य केंद्रों पर एनएनसी जांच का लक्ष्य संबंधित क्षेत्र की आबादी के सापेक्ष गर्भधारण की अनुमानित संख्या से तय होता है।
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ताकि बीमारी का हो इलाज, जच्चा-बच्चा रहें सुरक्षित
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गुप्ता के मुताबिक, एएनसी टेस्ट में रक्त और पेशाब संबंधी सभी जांचें होती हैं। मां और बच्चे के बीच रक्त संगतता का पता चलता है। एचआईवी, शुगर, रक्ताल्पता, रक्तचाप, हेपेटाइटिस, थाॅयराइड आदि जांचें होती हैं। ये जांचें गर्भधारण के शुरुआती 12 सप्ताह यानी प्रथम तिमाही में होती हैं, ताकि समय से बीमारी का पता चले और इलाज हो सके।
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जननी सुरक्षा योजना मुहिम की निगरानी की जा रही है, पर कई गर्भवतियां निजी अस्पताल में जांच कराती हैंं। स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क जांच होती है, इसके लाभ लेने के लिए गर्भवतियों और उनके परिजनों को जागरूक करने के लिए दिशानिर्देश दिए गए हैं। नियमित निगरानी हो रही है।
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- डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
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