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इन्फेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल लागूः कोरोना से लड़ने वाले अस्पतालों में ही चल सकेगी ओपीडी

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ओपीडी में बच्चे की थर्मल स्क्रीनिंग करते कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
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निजी अस्पतालों को संक्रमण से बचाव के लिए करने होंगे कड़े इंतजाम, ढिलाई पर सख्त कार्रवाई
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डीएम से मिलने पहुंचे आईएमए पदाधिकारी, कहा- फिलहाल प्रोटोकॉल पूरा करना मुमकिन नहीं, मांगी रियायत
पदाधिकारियों ने डीएम से की समस्याओं के निस्तारण की मांग, डीएम ने सशर्त स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखने की दी मंजूरी

बरेली। रेड जोन में शामिल होने के साथ जिले के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में इन्फेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल लागू हो गया है। इसके बाद अब वही अस्पताल मरीजों का इलाज कर पाएंगे जो कोरोना संक्रमण से सुरक्षा संबंधी प्रोटोकॉल की सभी शर्ते पूरी करेंगे। संकट यह है कि फिलहाल ज्यादातर अस्पतालों में यह इंतजाम नहीं हैं। इसी वजह से शुक्रवार को आईएमए के पदाधिकारियों ने डीएम से मुलाकात की लेकिन उन्होंने नियम-कायदों में कोई भी ढील देने से इनकार कर दिया।
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आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजेश के नेतृत्व में डॉक्टरों ने डीएम से मुलाकात कर उन्हें बताया कि लॉकडाउन की वजह से प्रोटोकॉल पूरा करने के लिए तमाम जरूरी उपकरण नहीं मिल पा रहे हैं। केमिकल समेत पीपीई किट, सैनिटाइजर और ग्ल्ब्स के साथ सुरक्षा संबंधी संसाधन भी मुहैया नहीं हो पा रहे हैं। डॉ. राजेश ने बताया कि डीएम को भरोसा दिलाया गया कि हालात देखते हुए अस्पताल संक्रमण से बचाव के लिए हर मुमकिन एहतियात पूरी करने को तैयार हैं। उन्होंने बताया कि डीएम ने निजी अस्पतालों को फिलहाल सशर्त चलाने को कहा है। इस दौरान डॉ. राजीव गोयल, डॉ. रवीश अग्रवाल, डॉ. नीरा अग्रवाल, डॉ. आईएस तोमर, डॉ. अरुण कुमार व अन्य मौजूद रहे।

यह है प्रोटोकॉल

आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजेश अग्रवाल ने बताया कि पिछले दिनों हजियापुर के एक व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके दो दिन बाद उसकी मौत हो गई। इसके अलावा उसके दो रिश्तेदार भी कोरोना संक्रमित मिले हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइड लाइन के मुताबिक इसके बाद ग्रीन जोन से निकलकर बरेली रेड जोन में शामिल हो गया है और यहां के अस्पतालों में स्वत: इन्फेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल लागू हो गया है। उन्होंने बताया कि इस प्रोटोकॉल के तहत अब अस्पतालों को बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण की समुचित व्यवस्था करने के साथ पीपीई किट, सैनिटाइजर, मास्क, ग्लब्स का इंतजाम करना होगा साथ ही निर्देशों के मुताबिक हर चार घंटे बाद कीटाणुनाशक रसायनों का प्रयोग भी अनिवार्य तौर पर करना होगा। प्रोटोकॉल के मुताबिक संक्रमण से बचाव के लिए और कई जरूरी संसाधन जुटाने के साथ सभी नियमों का शत प्रतिशत पालन किया जाना भी अनिवार्य है। इसमें किसी भी ढिलाई पर अस्पताल पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

एक से बढ़कर एक अस्पताल मगर संक्रमण से बचाव का नहीं इंतजाम

एक से बढ़कर एक मल्टी स्पेशियलिटी अस्पतालों की अच्छी-खासी तादाद की वजह से बरेली की पहचान मेडिकल हब के तौर पर होती है लेकिन रेड जोन में शामिल होने के बाद इन्फेक्शन प्रिवेन्शन प्रोटोकॉल लागू होते ही साफ हो गया कि ये अस्पताल मरीजों के लिए कितने सुरक्षित हैं। हालांकि प्रोटोकॉल के मुताबिक जिन अस्पतालों में ओटी की सुविधा है, उन्हें नियमों का पालन करने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं करना होगा, लेकिन जिनमें यह सुविधा नहीं है उनके सामने बड़ी मुश्किल पैदा हो गई है। इसी वजह से जिले भर में आठ सौ आईएमए सदस्य होने के बावजूद सिर्फ 140 डॉक्टर ही इन्फेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल की ट्रेनिंग में शामिल हुए। अब अध्यक्ष डॉ. राजेश ने सभी डॉक्टरों से नियमों के पालन करने का अनुरोध किया है। साथ ही बेहद जरूरी होने पर ही मरीजों को अस्पताल आने को कहा है।
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