राजस्व कर्मी ने मौका और अभिलेख देखे बिना कर दिया अंश निर्धारण
बरेली। अपात्र महिला को 1.13 करोड़ रुपये मुआवजा देने के मामले की जांच में पता चला है कि तहसीलदार सदर की गलत रिपोर्ट की वजह से ऐसा हुआ है। राजस्व कर्मियों ने मौका और अभिलेख देखे बिना ही सह खातेदारों का अंश निर्धारित कर दिया और उसी रिपोर्ट को तहसीलदार सदर ने विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) कार्यालय भेज दिया। इसी आधार पर एसएलएओ ने अपात्र भगवान देई के खाते में 24 फरवरी 2025 को मुआवजा राशि ट्रांसफर की थी। अब वसूली के लिए आरसी (वसूली प्रमाणपत्र) जारी किया गया है।
सदर तहसील के महेशपुर ठाकुरान की भगवान देई के खाते में 1.13 करोड़ रुपये भेजने का खुलासा होने पर डीएम अविनाश सिंह ने एडीएम न्यायिक/विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी देश दीपक सिंह से मामले की जांच कराई। जांच रिपोर्ट में सह खातेदार यशपाल के शिकायतीपत्र का भी उल्लेख है, जिसमें उसने अपात्र भगवान देई से रकम वापस लिए जाने की मांग भी की है।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 11 दिसंबर 2023 को संबंधित भूमि का अवार्ड घोषित किया गया था। 13 फरवरी 2025 को तहसीलदार सदर ने अधिग्रहण से प्रभावित संयुक्त गाटा संख्या-517 के सह खातेदारों के अंश प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए थे। इस गाटे का कुल रकबा 2.3150 हेक्टेयर है। इसमें भगवान देई की 0.3160 हेक्टेयर जमीन है। शेष जमीन चार भाइयों अमर पाल सिंह, अर्जुन सिंह, देशपाल सिंह और यशपाल सिंह के नाम है। संवाद
अपात्र को मुआवजा मिलने में गलती केवल भगवान देई की है। संबंधित गाटे के सह खातेदारों के अंश निर्धारण की रिपोर्ट तहसील से आई थी। भगवान देई को बताना चाहिए था कि उसका हिस्सा अधिग्रहण से प्रभावित नहीं है। एक ही गाटा संख्या होने और भगवान देई की तरफ से तथ्य छिपाने की वजह से उसे मुआवजा जारी हुआ था। - देश दीपक सिंह, जांच अधिकारी/एसएलएओ
प्रकरण की जांच कराई है। रिपोर्ट मिलने पर दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। - अविनाश सिंह, डीएम