बरेली। अमेरिका-ईरान के बीच समझौते के बाद व्यावसायिक एलपीजी आपूर्ति संबंधी कई पाबंदियों से सरकार ने राहत दी है। अब उद्योगों को डेढ़ गुना कीमत पर एलपीजी की आधी खुराक मिलेगी। उद्यमियों का कहना है कि आपूर्ति 20 से बढ़ाकर 50% किए जाने से राहत मिलेगी, पर युद्ध से पूर्व करीब 1900 रुपये में मिलने वाला व्यावसायिक गैस सिलिंडर अब करीब 31 सौ रुपये में मिल रहा है। इससे उत्पादन लागत बढ़ रही है। व्यावसायिक एलपीजी की कीमत कम करने समेत कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की मांग उठाई है।
जिला पूर्ति अधिकारी मनीष कुमार सिंह के मुताबिक, पश्चिम एशिया संकट के दौरान घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध गैस देने के लिए सरकार ने व्यावसायिक आपूर्ति पर अस्थायी नियंत्रण लगाया था। स्थिति सामान्य होने से प्रतिबंध में ढील दी है। पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) नेटवर्क का विस्तार और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को उससे जोड़ने का क्रम जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि शासनादेश सभी एजेंसी संचालकों और पेट्रोलियम कंपनियों को भेजकर नियमानुसार आपूर्ति के लिए कहा गया है। पूर्व में व्यावसायिक उपभोक्ताओं से मासिक जरूरत के सापेक्ष खपत का रिकॉर्ड लिया गया था। इसके सापेक्ष 50 फीसदी एलपीजी दी जाएगी।
महंगे ईंधन से लोगाें को कैसे मिलेगा सस्ता भोजन
होटेलियर वेलफयेर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अनुराग सक्सेना के मुताबिक, महंगे ईंधन की वजह से उत्पाद के दाम बढ़ाने की मजबूरी बनी हुई है। 60 फीसदी संचालकों ने पीएनजी कनेक्शन लिया है पर कई ढाबे, कैंटीन और छोटे कारोबारी महंगे सिलिंडर से कारोबार कर रहे हैं। एलपीजी की तुलना में पीएनजी प्रेशर कम होने से भोजन पकने में वक्त लगता है। सिलिंडर की महंगाई से खाद्य पदार्थों की बढ़ी कीमत में कटौती के उम्मीद कम ही है।
होर्मुज खुला पर असर दिखने में लगेंगे तीन माह
खाद्य प्रसंस्करण कारोबारी कपिल चंदानी के मुताबिक, फैक्टरियों में कच्चे माल की आपूर्ति का संकट बरकरार है। पैकेजिंग, तेल, मसाले, परिवहन के महंगे होने का असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। होर्मुज खुला है पर कारोबार पूरी तरह पटरी पर आने में दो-तीन माह तक लग सकते हैं। एलपीजी कनेक्शन की अनिवार्यता, बुकिंग संबंधी 25 दिन समय सीमा की बाध्यता खत्म हो तो मानव संसाधन मिलने से राहत मिलेगी।