बरेली। पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति प्रभावित हुई तो ज्यादातर उद्यमियों ने वैकल्पिक व्यवस्था बना ली। नतीजा, अब कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति भरपूर है, पर मांग घट गई है। दूसरी ओर, पेट्रोलियम कंपनियां गैस एजेंसी संचालकों पर बिक्री का दबाव बना रही हैं।
कॉमर्शियल सिलिंडरों की सर्वाधिक जरूरत होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और गत्ता फैक्टरियों समेत अन्य औद्योगिक इकाइयों में होती है। आपूर्ति प्रभावित होने पर कारोबारियों ने पीएनजी कनेक्शन ले लिए। इंडक्शन व कोयले की भट्ठी जैसे विकल्प भी अपनाए। इससे एलपीजी पर निर्भरता कम हुई है। अब कॉमर्शियल सिलिंडरों की मांग सामान्य दिनों के सापेक्ष 30 फीसदी घट गई है।
गैस एजेंसी संचालकों का आरोप है कि कंपनियां उन पर सिलिंडर उठाने और बेचने का दबाव बना रही हैं। जितने सिलिंडर की डिमांड भेजी जाती है, पेट्रोलियम कंपनी उससे ज्यादा भेज रही हैं। ऐसे में उनको स्टॉक करना परेशानी का सबब बन रहा है। कम कीमत पर सिलिंडर बेचने पड़ रहे हैं।
एजेंसी सरेंडर करने या बेचने की विवशता
अखिल भारतीय एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव आदर्श गुप्ता के मुताबिक, लगातार घाटे और दबाव के चलते कुछ एजेंसी संचालक कारोबार बंद करने या बेचने पर विचार कर रहे हैं। हाल ही में किला क्षेत्र की वर्षों पुरानी गैस एजेंसी के बिकने को भी इसी स्थिति से जोड़कर बताया। कहा कि प्रदेशभर के डिस्ट्रीब्यूटर अब आंदोलन करने का विचार कर रहे हैं। इस संबंध में लगातार बैठकें जारी हैं।
आपात स्थिति के लिए विकल्प अपनाना जरूरी
आईआईए बरेली चैप्टर के चेयरमैन शेखर अग्रवाल के मुताबिक, युद्ध के दौरान कॉमर्शियल एलपीजी की उपलब्धता प्रभावित रही। कई दिनों तक के बाद कारोबारियों ने वैकल्पिक साधन अपनाए। अब आपूर्ति भरपूर है पर कीमत दोगुनी हो गई है। ऐसे में इसके उपयोग से तैयार उत्पाद की लागत बढ़ेगी। लिहाजा, वैकल्पिक साधन ही कारोबार के लिहाज से उपयुक्त हैं।
अब अतिरिक्त स्टॉक के बजाय तत्काल का सौदा
आईआईए के चैप्टर सचिव धनंजय विक्रम सिंह के मुताबिक, सप्ताहभर में पेपर के दाम करीब तीन रुपये प्रति किलो बढ़े हैं। उर्वरक उद्योग में प्रयोग होने वाले सल्फ्यूरिक एसिड की कीमत करीब डेढ़ गुना हो गई है। चीन से भारत आने वाले कंटेनरों का समुद्री भाड़ा भी डेढ़ गुना तक बढ़ गया है। इससे व्यापारी अतिरिक्त स्टॉक के बजाय तात्कालिक जरूरत के मुताबिक माल मंगा रहे हैं।
पीएनजी समेत अन्य विकल्प अपनाने से कॉमर्शियल एलपीजी की मांग पहले से कम हुई है। कॉमर्शियल सिलिंडरों का मामला सीधे एजेंसी और पेट्रोलियम कंपनियों से जुड़ा है। अगर बिक्री के लिए दबाव बनाने की शिकायत आएगी तो मामले को दिखवाया जाएगा। - मनीष कुमार सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी