बरेली। ऊर्जा संकट का दंश पूरी दुनिया झेल रही है। उद्योग प्रभावित होंगे तो इसका असर आम आदमी पर भी पड़ेगा। इसलिए उद्योगों के सुचारु संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के साथ ही उद्यमियों को रियायत भी देनी चाहिए। सोमवार को अमर उजाला कार्यालय परिसर में आयोजित संवाद में एलपीजी किल्लत से उद्योगों को होने वाली समस्या और समाधान विषय पर मंथन करते हुए उद्यमियों, निर्यातकों समेत व्यापारी कल्याण बोर्ड के राष्ट्रीय और प्रांतीय सदस्यों ने ये बातें कहीं। घरेलू गैस उपभोक्ताओं से जरूरत पर ही बुकिंग करने की अपील की।
राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि एलपीजी संकट के बीच डीजल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से कई कारोबारी डीजल स्टोर कर रहे हैं। यह बिल्कुल गलत है। लघु उद्योग भारती अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने कहा कि कॉमर्शियल सिलिंडर मिल नहीं रहे। पीएनजी की कीमत बढ़ गई। कच्चा माल मिल नहीं रहा। इससे उत्पादन लागत भी बढ़ेगी। विशाल अरोरा ने उद्याेगों की सप्लाई चेन बनाए रखने के लिए सरकार से कच्चे माल की आपूर्ति की मांग की।
पैकेजिंग सामग्री के भाव बढ़े, सभी उत्पाद हाेंगे महंगे
भोजीपुरा औद्योगिक क्षेत्र के अध्यक्ष अजय शुक्ला ने कहा कि पैकेजिंग मैटेरियल अगर महंगे होंगे तो इसका असर सभी उत्पादों पर पड़ेगा। एलपीजी किल्लत से गत्ता फैक्टरियाें का उत्पादन प्रभावित है। कई बंद हो चुकी हैं। फरीदपुर औद्योगिक क्षेत्र के सचिव रजत मेहरोत्रा ने कहा कि संकट में उद्यमियों पर भी बोझ डाला जाता है। एमएसएमई अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, पर सारा भार इसी पर डालना उचित नहीं। आईआईए के चैप्टर चेयरमैन मयूर धीरवानी ने बिजली को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत बताते हुए सरकार से छूट देने की मांग की।
संकट हमेशा रहेंगे, हमें आत्मनिर्भर बनाना होगा
मेंथॉल और इत्र निर्यातक गौरव मित्तल ने कहा कि पहले कोरोना फिर यूक्रेन-रूस युद्ध, अमेरिकी टैरिफ और अब पश्चिम एशिया युद्ध जैसे संकट हमेशा रहेंगे। दीर्घकालिक राहत के लिए भारत को आत्मनिर्भर बनना होगा। जो उत्पाद देश में बन सकते हैं, उनके लिए विदेश पर निर्भर रहना सही नहीं। प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के सदस्य पवन अरोड़ा, एलपीजी एसोसिएशन के सचिव आदर्श गुप्ता, उद्यमी अर्पित कुमार, आईआईए के कोषाध्यक्ष आशीष गुप्ता, उद्यमी रमेश अग्रवाल, प्लाईवुड एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष सलिल बंसल व अन्य लोग मौजूद रहे।
प्रमुख मांगें
- औद्योगिक क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति की व्यवस्था हो।
- कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
- विकल्प हैं, लेकिन उसके लिए सरकार से विशेष छूट मिले।
- बेरोजगारी पर अंकुश के लिए उद्योग संचालन सुचारु रहे।
- कच्चे माल की कीमतों पर नियंत्रण के लिए निगरानी व्यवस्था हो।
- कॉमर्शियल सिलिंडर उपलब्ध कराए जाएं।
- आवश्यक सेवाओं में एमएसएमई यानी उद्योग भी शामिल हों।