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घोषणा और हकीकत में फर्क पर उद्यमियों में नाराजगी

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बरेली। जिला उद्योग बंधु की बैठक में सरकारी घोषणाओं का लाभ उद्यमियों को नहीं मिलने और मनमाने शासनादेश जारी होने पर बहस छिड़ गई। सिस्टम से भड़के उद्यमियों ने कह दिया कि सरकार अगर घोषणाएं पूरी नहीं कर पा रही है तो योजनाएं बंद कर दे, क्योंकि कारोबारी इधर-उधर से संसाधन जुटाकर काम-धंधा शुरू करते हैं तो सिस्टम उन्हें ऐसा उलझा देता है कि कोई विकल्प ही न बचे। इस पर सीडीओ ने निर्देश दिए कि इससे संबंधित नीतिगत मामलों का अध्ययन कर पत्र बनाकर शासन को संदर्भित किया जाए।
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सोमवार शाम वेबिनॉर पर हुई बैठक में उद्यमियों ने सरकारी घोषणाओं और उसके क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि करीब ढाई वर्ष पहले हुए इन्वेस्टर समिट में तमाम घोषणाएं हुई लेकिन शासनादेश इसके विपरीत हुए। इससे बरेली समेत सभी जिलों में तमाम कारोबारी परेशान हैं। उद्यमियों ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि अमर उजाला लगातार कारोबारियों की दिक्कतों को सिस्टम के सामने रख रहा है, लेकिन उन्हें दूर नहीं किया जा रहा है। भोजीपुरा इंडस्ट्रियल एरिया के अध्यक्ष अजय शुक्ला ने कहा कि कागजी घोषणाएं नहीं होनी चाहिए, क्योंकि कारोबार शुरू करने वाला मेहनत से प्रोजेक्ट तैयार करता है, साकार होने से पहले ही सरकारी सिस्टम में फंस जाता है। संबंधित विभाग योजनाओं की सही जानकारी नहीं दे पाता है। सिस्टम की मनमानी में तमाम निवेशक फंस गए हैं। वे अब सोचने लगे हैं कि उद्योग लगाएं या नहीं। उन्होंने पीएनसी की मनमानी का मामला उठाते हुए कहा कि अभी तक नाला नहीं बना है। उनके सवाल उठाते ही कंपनी ने सफाई दी कि नाला निर्माण शुरू करा दिया है।
आईआईए के मंडलीय अध्यक्ष विमल रेवाड़ी ने कहा कि औद्योगिक नीति 2012 में कारोबारी लाभ उठा रहे थे लेकिन 2017 में जारी नीति में कई जटिलताएं कर दीं। जबकि इन्वेस्टर समिट में सरकार ने कहा था कि उद्योग-धंधे शुरू करने वालों को जीएसटी रिटर्न और सब्सिडी का लाभ मिलेगा, लेकिन शासनादेश में इसके विपरीत शर्तें हैं। प्रक्रिया इतनी जटिल कर दी गई है कि काम-धंधा शुरू करने वाले सिस्टम के चक्कर ही लगा रहे हैं। एसओपी प्रक्रिया भी इतनी जटिल है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वालों को सिर्फ चक्कर ही लगाना है। अब कहा जा रहा है कि ऑनलाइन पार्ट-2 फार्म भरा जाए, जबकि घोषणाओं में ऐसा कुछ नहीं था इसलिए इन्वेस्टर समिट में निवेदकों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। स्थिति यह है कि तीस माह बीतने पर भी योजनाएं साकार नहीं हो पाई हैं। आईआईए के राष्ट्रीय सचिव सुरेश सुंदरानी ने कहा कि ये मुद्दे हमने कार्यकारिणी में भी उठाए थे। प्रदेश भर में ऐसी ही स्थिति है। योजनाओं का पूरा लाभ दिलाने और प्रभावित निवेशकों का मामला शासन स्तर पर संदर्भित किया जाए। व्यापारी कल्याण बोर्ड सदस्य पवन अरोरा ने कहा कि वह भी मामला समझकर शासन तक पहुंचाएंगे। परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया के अध्यक्ष घनश्याम खंडेलवाल ने भी इन्हीं सब मुद्दों पर अपनी बात रखी।
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पत्र लिखा जाएगा
बैठक की अध्यक्षता कर रहे सीडीओ सीएम गर्ग ने संयुक्त आयुक्त उद्योग आरआर गोयल से कहा कि वह प्रभावित उद्यमियों की समस्याओं को समझ कर एक पत्र बना लें। इससे शासन स्तर तक इस समस्या को संदर्भित किया जा सके।
स्ट्रीट लाइट न लगने का भी उठा मुद्दा
बैठक में स्ट्रीट लाइट नहीं लगने का मामला उठा तो नगर निगम के प्रकाश अधीक्षक कोई जवाब नहीं दे पाए। सीडीओ ने परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में बिजली लाइनें दुरुस्त न होने पर नाराजगी जताई। कहा, इस मनमानी से जिले की रैंकिंग प्रभावित होती है। बहेड़ी मार्ग पर पेड़ संबंधी प्रकरण हल करने और सीबीगंज ढाबों को हटाने के लिए ट्रैफिक पुलिस को निर्देशित किया गया। बैठक में सतीश अग्रवाल, राजेश गुप्ता, संदीप टंडन आदि उद्यमी और संबंधित विभागों के अधिकारी ऑनलाइन बैठक से जुड़े। नगर निगम से संजय चौहान, यूपीसीडा से राजकमल सिंह देर से जुड़ने पर सीडीओ ने नाराजगी जताई और लोनिवि अफसरों के नदारद रहने पर जवाब तलब करने के निर्देश दिए।
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