बरेली। जाट रेजिमेंट के इतिहास में मंगलवार को बरेली में नई बटालियन की स्थापना के साथ गर्व का एक और सुनहरा अध्याय जुड़ जाएगा। थल सेना उपाध्यक्ष और कर्नल ऑफ द जाट रेजिमेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ध्वज फहराकर 24 जाट बटालियन के उदय की घोषणा करेंगे। जाट रेजिमेंट सेंटर में इस कार्यक्रम के दौरान पूरे सैन्य क्षेत्र को नो मूवमेंट जोन घोषित कर दिया जाएगा। इस दौरान सैन्य क्षेत्र में किसी को भी आवाजाही की इजाजत नहीं होगी।
बरेली में इससे पहले 2016 में चार साल पहले 23 जाट बटालियन की स्थापना की गई थी। अब मंगलवार को जाट रेजिमेंट सेंटर में 24 जाट रेजिमेंट के गठन की औपचारिकता पूरी करने के साथ उसमें शामिल होने वाले साढ़े आठ सौ जवानों को मातृभूमि के प्रति समर्पण और उसकी रक्षा के लिए बलिदान होने का संकल्प दिलाया जाएगा। थल सेना उपाध्यक्ष व कर्नल ऑफ द जाट रेजिमेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी, पीवीएसएम, एवीएसएम, वाईएसएस, वीएसएम, एडीसी इन जवानों को संबोधित करने के बाद 24 जाट बटालियन का ध्वज फहराएंगे। सेना की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक सुबह पौने दस बजे से जाट रेजिमेंट सेंटर में कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। इस दौरान पूरे सैन्य क्षेत्र में नो मूवमेंट जोन घोषित कर दिया जाएगा और किसी की भी आवाजाही पर पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा।
24 जाट बटालियन गठित होने के साथ रेजिमेंट सेंटर का विस्तार होगा। नई बटालियन में साढ़े आठ सौ जवानों और अफसरों की पलटन को सभी यूनिटों से प्रतिनिधित्व देकर खड़ा किया जा रहा है। कोविड प्रोटोकॉल के तहत संक्रमण से बचाव के इंतजाम के साथ 24 जाट बटालियन के स्थापना की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
शौर्य गाथा: 41 युद्ध सम्मान के साथ सबसे
ज्यादा मेडल हासिल करने वाली रेजिमेंट
जाट रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा पदक प्राप्त करने वाली रेजिमेंट में से एक है। सन् 1839 से 1947 तक इस रेजिमेंट के नाम 41 युद्ध सम्मान दर्ज हैं। रेजिमेंट में मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के हिंदू जाटों की भर्ती की जाती है। जाट रेजिमेंट को अब तक पांच बैटल ऑनर्स, दो अशोक चक्र, आठ महावीर चक्र, 12 कीर्ति चक्र, 46 शौर्य चक्र, 39 वीर चक्र और 253 सेना मेडल गैलेंट्री से नवाजा जा चुका है। रेजिमेंट में चार अर्जुन अवार्ड विजेता, आठ ओलंपियन, दो हिंद केसरी, एक ध्यानचंद अवार्ड, एक तेनजिंग नार्गे अवार्ड के अलावा कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी हैं।
अंग्रेजों ने मुगलों से लोहा लेने के लिए
1795 में किया था रेजिमेंट का गठन
जाट रेजिमेंट की स्थापना 1795 में कलकत्ता नेटिव मिलेशिया के रूप में हुई थी। अंग्रेजों ने मुगलों के खिलाफ इस रेजिमेंट का गठन किया था। 1859 में इस यूनिट को एक रेगुलर इन्फेंट्री बटालियन बनाकर 18वीं बंगाल इन्फेंट्री नाम दिया गया। 1922 में गठित नौ जाट रेजिमेंट को शुरुआत में चार जाट का नाम दिया गया। रेजिमेंट की दूसरी पुरानी पलटनें जिसमें एक, तीन जाट, बंगाल सेना और दो जाट, बांबे सेना से आई थीं। 1842 के प्रथम अफगान युद्ध में रेजिमेंट को लाइट इन्फेंट्री का खिताब मिला था। 1892 में फर्स्ट जाट को जाट लाइट इन्फेंट्री बनाया। प्रथम विश्वयुद्ध में इसे रॉयल के टाइटल सम्मान मिला। 1817 में दो जाट की स्थापना दस बांबे आर्मी इन्फेंट्री के रूप में हुई और 1848 के दूसरे एंग्लो-सिख युद्ध में दो जाट ने मुल्तशान का बैटल ऑनर हासिल किया। बरेली जाट रेजिमेंट सेंटर का मुख्यालय है।
जाट रेजिमेंट
स्थापना: 1795
आदर्श वाक्य: संगठन व वीरता
युद्धघोष: जाट बलवान जय भगवान
मुख्यालय: बरेली, उत्तरप्रदेश
एक नजर में
- 1947 के बाद से भारतीय रेजिमेंट में बदला स्वरूप
- 152 साल ब्रिटिश राज में रही रेजिमेंट
- 17 वीं बटालियन से थे महावीर चक्र विजेता कैप्टन अनुज नैयर