बरेली। स्मार्टफोन और अन्य डिजिटल स्क्रीन के बढ़ते इस्तेमाल से बच्चों की आंखों पर दबाव पड़ रहा है। कम उम्र में नजर कमजोर होने और चश्मा लगने के मामले आ रहे हैं। राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत स्कूलों में की गई स्क्रीनिंग में बच्चों को चश्मा लग रहा है।
अप्रैल से अगस्त तक की गई स्क्रीनिंग में निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 47 फीसदी उपलब्धि दर्ज की गई है। स्क्रीनिंग के बाद 40 बच्चों को चश्मे दिए। अन्य को बचाव के उपाय बताए गए। विश्व दृष्टि दिवस के अवसर पर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शेर अली ने बताया कि मोबाइल या दूसरी स्क्रीन नजदीक से देखना, कम रोशनी, आंखों को आराम न देना, कम खेलने से भी आंखों पर दबाव बढ़ सकता है।
रोजाना ओपीडी में आठ से दस बच्चों की जांच
तीन सौ बेड अस्पताल की नेत्र ओपीडी में रोजाना आठ से दस बच्चों के आंखों की जांच हो रही है। उन्हें कम दिखने, जलन, खुजली, तेज रोशनी से दिक्कत आदि समस्या होती है। अभिभावकों को बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित रखने, लगातार स्क्रीन देखने के बीच आंखों को आराम देने, बच्चों को रोजाना कुछ समय खुले वातावरण में खेलने देना चाहिए। नजर से संबंधित कोई लक्षण दिखने पर नेत्र जांच करानी चाहिए।