कोर्ट में मुआवजे के आकलन रिपोर्ट पर दर्ज कराई थी आपत्ति
बरेली। बरेली-सितारगंज हाईवे के मामले में भूस्वामियों से कोर्ट ने मुआवजे के संबंध में इंडेम्निटी बॉन्ड भराने के आदेश दिए हैं। दोनों भूस्वामियों ने मुआवजे का आकलन गलत हाेने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिस पर कोर्ट ने 6.95 करोड़ रुपये का इंडेम्निटी बॉन्ड बतौर गारंटी भरवाने के आदेश दिए हैं।
बरेली-सितारगंज हाईवे के निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि में पीलीभीत के अमरिया क्षेत्र की सीमा रानी और बबिता की भूमि हाईवे के एलाइनमेंट के दायरे में आई थी। राजस्व, एनएचएआई और लोनिवि के संयुक्त सर्वे के बाद भूमि के मुआवजे की धनराशि का आकलन किया गया। एनएचएआई को करीब 3.5 करोड़ रुपये मुआवजे की धनराशि का आकलन कर रिपोर्ट भेज दी गई, लेकिन सीमा रानी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा कर मुआवजे के आकलन की रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज कराई थी। सीमा रानी की इसी भूमि का एक मामला पीलीभीत के डीएम कोर्ट में भी चल रहा है। उन्होंने हाईकोर्ट में मुआवजे की धनराशि 6.95 करोड़ रुपये मांगी है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद एसएएलओ को मुआवजा देने के आदेश दिए थे, लेकिन कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण हाईकोर्ट ने आदेश आने तक इंडेम्निटी बॉन्ड भरवाने के आदेश दिए। ताकि, आदेश अगर सीमा रानी के खिलाफ आता है तो धनराशि वापस ली जा सकी।
क्या होता है आइडेमिनिटी बांड
इंडेम्निटी बॉन्ड एक वित्तीय या कानूनी दस्तावेज़ होता है, जिसमें एक पक्ष दूसरे पक्ष के खिलाफ किसी नुकसान या हानि के लिए जिम्मेदारी लेता है। इसे विभिन्न गतिविधियों जैसे व्यापार, वित्तीय सौदों, यात्रा आदि में उपयोग किया जाता है।
सीमा रानी को कोर्ट के आदेश पर इंडेम्निटी बॉन्ड भरकर जमा करने के लिए कहा गया है। बॉन्ड पेपर जमा हो जाएंगे। उन्हें मुआवजा दे दिया जाएगा। - विजय वर्धन तोमर, एसएलएओ, पीलीभीत
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