बरेली। जीवित रहते लोग दूसरों का सहयोग करते हैं, पर कुछ लोग मृत्यु के बाद भी दूसरों के लिए नई जिंदगी का आधार बनते हैं। जिले में अब तक छह सौ से ज्यादा कार्निया और नेत्रदान हुए। नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. संजय कुमार के मुताबिक, जिले में अब तक करीब 50 किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके हैं।
बरेली में हार्ट को छोड़कर किडनी, कॉर्निया समेत अन्य अंगों का प्रत्यारोपण किया जा रहा है। अंगदान दिवस पर स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से इस महादान के लिए आगे आने की अपील की है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जो लोग अंगदान करना चाहते हैं, वे स्वैच्छिक घोषणापत्र भरकर इच्छा दर्ज करा सकते हैं, ताकि मृत्यु के बाद उसके परिजन इस संकल्प को पूरा कर सकें।
निजी मेडिकल कॉलेज की ऑप्थेल्मोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. नीलिमा मेहरोत्रा के मुताबिक, मृत्यु के बाद जैसे अंगदान, वैसे ही नेत्रदान होता है। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों के जीवन में उजाला होता है। किसी भी उम्र, धर्म, लिंग, रक्त समूह का व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है।
संकल्प पत्र भरते हैं पर कई परिजन नहीं देते सूचना
प्रतिवर्ष तमाम लोग नेत्रदान, देहदान और अंगदान का संकल्प लेते हैं, लेकिन निधन के बाद उनके परिजन अस्पताल को सूचना दिए बगैर अंतिम संस्कार कर देते हैं। ऐसी स्थिति में दान देने वालों की संख्या कागजों पर हजार, जबकि हकीकत में महज एक फीसदी रह जाती है। जिले में सर्वाधिक नेत्रदान ही हो रहे हैं। किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट की संख्या सीमित है।