बहेड़ी। रिछोली गांव में 15 हजार घन मीटर मिट्टी के खनन की अनुमति लेकर खनन करने वाले लोगों ने किच्छा नदी पर अवैध रास्ता बना लिया। शिकायत पर डीएम ने बाढ़खंड के जेई और तहसीलदार को जांच के लिए शनिवार रात मौके पर भेजा। वहां अवैध रूप से बनाए गए रास्ते को हटाया गया। बाढ़खंड जेई आशुतोष शर्मा की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
डीएम कार्यालय स्थित खनन अनुभाग की ओर से दिनेश कुमार को नौ जून को 15 हजार घन मीटर मिट्टी के खनन की अनुमति दी गई थी। इनमें यूपी-उत्तराखंड की सीमा के गांव रिछोली के किसान नसीब सिंह, अवतार सिंह, चितमन कौर, दलविंदर कौर और शिवेंद्र कौर की जमीन शामिल है। यह छह सितंबर तक वैध रहती।
आरोप है कि खनन करने वाले लोगों ने रिछोली गांव के किनारे बह रही किच्छा नदी में जहां संकरी जगह थी, वहां सीमेंट के बड़े-बड़े ह्यूम पाइप डालकर रास्ता बना लिया और नदी के इस पार मिट्टी लाने लगे। स्थानीय प्रशासन और खनन विभाग ने इसकी मौखिक सहमति दी थी। किसानों ने विरोध किया और डीएम अविनाश सिंह से की। इसपर डीएम ने बाढ़खंड जेई और तहसीलदार को जांच के लिए मौके पर भेजा। इस बाबत बाढ़खंड के जेई आशुतोष शर्मा ने बताया कि जांच टीम शनिवार देर रात मौके पर पहुंची और जेसीबी से पाइप हटवा दिए। तहरीर देकर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। खनन रुकवा दिया गया है। सीओ बहेड़ी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि जेई की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली है। आरोपियों को चिह्नित करके कार्रवाई की जाएगी।
जगह-जगह हो रहा खनन
ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन और खनन विभाग की मिली भगत से रात में किच्छा में उत्तराखंड से लेकर बहेड़ी के नारायण नगला तक जगह-जगह अवैध रूप से बालू का खनन किया जाता है। गांवों के लिंक रोड के जरिये बालू भरे डंपर निकाले जाते हैं। ये उत्तराखंड के स्टोन क्रशरों में बेची जाती है। इसकी शिकायत कई बार की जा चुकी है। आरएसएस के प्रांत प्रचारक शशांक भाटिया ने भी पिछले साल अवैध खनन की शिकायत की थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने खनन पर रोक लगा दी थी लेकिन कुछ दिन में काम फिर शुरू हो गया।