बरेली। खनन सिर्फ नदियों में ही नहीं किया जा रहा है, शहर में भराव के लिए मिट्टी की जरूरत भी अवैध खनन से पूरी की जा रही है। यह अलग बात है कि हर रोज सैकड़ों ट्रैक्टर ट्राली मिट्टी शहर में आने के बावजूद न जिला प्रशासन के पास इसका रिकार्ड है न इस पर कोई मानीटरिंग ही हो रही है। अफसर कितनी गहरी नींद में सो रहे हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मिट्टी के खनन के लिए प्रशासन से एक भी परमिशन नहीं ली गई है। हालांकि एडीएम वित्त की मानें तो यह सारा खेल पुलिस के संरक्षण में चल रहा है।
मार्च 2018 में मिट्टी पर रॉयल्टी तो खत्म कर दी गई लेकिन आदेश जारी किया गया कि खनन करने वालों को परमिशन लेने के साथ यह ब्योरा भी देना होगा कि वे मिट्टी के लिए कहां खनन कर रहे हैं और कहां मिट्टी का इस्तेमाल होगा। मगर असलियत यह है कि इस आदेश के तहत खनन विभाग से अब तक एक भी अनुमति नहीं ली गई है जबकि शहर में सैकड़ों कालोनियां बन चुकी हैं या बन रही हैं। नियम के मुताबिक मिट्टी का खनन करने से पहले खनन विभाग की अनुमति जरूरी है मगर बगैर परमिशन ही पीलीभीत बाईपास, मिनी बाईपास, डेलापीर रोड, बदायूं रोड समेत तमाम हिस्सों में खाली प्लाट और विकसित हो रहीं कॉलोनियों में हर रोज सैकड़ों ट्राली मिट्टी का इस्तेमाल हो रहा है।
ये हैं नियम
मिट्टी के खनन के लिए खनन विभाग की अनुमति जरूरी है। निर्धारित प्रारूप पर डीएम, एडीएम, खनन अधिकारी और बीडीओ के नाम पर एप्लीकेशन देनी होती है। आवेदक को जिस स्थान से मिट्टी लाई जा रही है, उसकी खतौनी के अनुसार भू स्वामी का भी पूरा ब्योरा देना होता है। यह भी सूचना देनी होती है कि कितनी मिट्टी का खनन हो रहा है, जहां मिट्टी खोदी जा रही है, वहां से निर्माण स्थल कितनी दूर है। मिट्टी ढोने वाले वाहन का नंबर, चालक का नाम और उसका मोबाइल नंबर भी बताना होता है।
10 ट्रॉली मिट्टी की ही है छूट
पिछले साल मार्च से पहले तक 10 ट्रॉली तक मिट्टी बगैर रायल्टी के ले जाने की छूट थी। किसानों को भी बाढ़ से खेतों में जाम होने वाली बालू और मौरंग को हटाने पर रायल्टी की छूट दी गई थी।
आवासीय प्लाट और कॉलोनियों में मिट्टी के भरान के लिए भी संबंधित लोगों को खनन विभाग से परमिशन लेनी चाहिए जो लोग नहीं कर रहे हैं। इसमें पुलिस की भी बड़ी भूमिका है। -मनोज कुमार पांडेय, एडीएम वित्त