बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) को किसानों के मुआवजे में मनमानी भारी पड़ सकती है। केवल ओम प्रकाश, रामप्रकाश और देवेंद्र और महेंद्र प्रताप का ही नहीं बल्कि फैजउल्ला खान, जाकिरा खान और पार्वती के भी 176 करोड़ रुपये का ब्याज समेत मुआवजा बीडीए दबाए बैठा है। इसमें 50 प्रतिशत अर्थात 88.22 करोड़ रुपये अगले आठ सप्ताह में निचली अदालत में जमा करने को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पारित कर रखा है। पहला आदेश 30 अप्रैल और दूसरा 29 मई 2025 को हुआ था।
लारा कोर्ट से सरला देवी के पक्ष में आए आदेश को बीडीए ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। वहां उसे पहले संबंधित धनराशि में 50 प्रतिशत धनराशि निचली अदालत में जमा करने के लिए कहा गया था। इस आदेश को बीडीए ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने 29 मई 2025 को अपने आदेश में हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए बीडीए को अगले आठ सप्ताह में 50 प्रतिशत धनराशि लारा कोर्ट में जमा करने के लिए कहा था।
बीडीए ने अभी तक उसका अनुपालन नहीं किया है। यही हाल पार्वती, जाकिरा खान, फैजउल्ला खान के मामले में भी है। इनके प्रकरण में भी शीर्ष अदालत ने बीडीए को सरला देवी के मामले की तरह से आदेश दे रखे हैं। मामले में 30 अप्रैल 2025 को न्यायमूर्ति एमएम सुंद्रेश और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की खंडपीठ ने आदेश पारित किया था।