यूं तो जाम में रोज ही तमाम लोग फंस जाते हैं और कोई कार्रवाई भी नहीं होती लेकिन जब आईजी ही जाम में फंस जाएं तो कार्रवाई तो होनी ही थी। जांच के बाद सातवें दिन एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बदायूं रोड स्थित रामगंगा पुल चौकी इंचार्ज गुरुदेव सिंह समेत तीन पुलिस वालों को निलंबित कर दिया। एसपी सिटी की जांच में एसओ सुभाषनगर बच गए। रिपोर्ट में उनकी मौके पर जाम लगने के समय मौजूदगी ही नहीं बताई गई है।
शुक्रवार को रात करीब दस बजे बदायूं रोड पर ट्रक खराब होने से जाम लगा था जिसमें आईजी की गाड़ी फंस गई थी। जाम में आईजी की गाड़ी देखकर कुछ ट्रक चालक उनके पास पहुंच गए थे। उन्होंने पुलिस पर वाहनों से वसूली करने की शिकायत की थी। आईजी ने रामगंगा पुल चौकी इंचार्ज गुरुदेव सिंह और हेड कांस्टेबिल शिवप्रताप सिंह, कांस्टेबिल मलखान सिंह को बुलाकर जमकर हड़काया था। एसओ सुभाषनगर सतीश यादव भी जाम लगते समय चौकी पर बैठकर चौकी इंचार्ज के साथ वाहनों का शमन शुल्क कटवा रहे थे। आईजी के जाम में फंसे होने की खबर मिलते ही वह रास्ता खाली कराने में जुट गए थे। आईजी के निर्देश पर एसएसपी ने एसपी सिटी समीर सौरभ से मामले की जांच कराई। जांच में एसपी सिटी ने एसओ को जाम लगने से दौरान मौके पर मौजूद ही नहीं दिखाया। यह बताया गया है कि वह जाम लगने की सूचना के बाद मौके पर पहुंचे थे। जबकि चौकी इंचार्ज का कहना है कि एसओ उन्हीं के साथ बैठकर वाहनों का चालान काटकर शमन शुल्क वसूल करा रहे थे। बृहस्पतिवार को एसएसपी ने एसपी सिटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर दरोगा समेत तीन पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया। हालांकि बदायूं रोड पर देर रात में वसूली का खेल अब भी जारी है।