फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घर तबाह हो गए तो मुई शराब से दुश्मनी क्यों न हो

Tue, 18 Apr 2017 01:27 AM IST
शिवांगी
विज्ञापन
घर तबाह हो गए तो मुई शराब से दुश्मनी क्यों न हो - फोटो : If the house is destroyed, then why should I have an animosity with alcohol
विज्ञापन
सिठौरा और शांति बिहार इलाके सात अप्रैल को तब चर्चा में आए जब यहां देशी ठेका शराब को बंद कराने का विरोध कर रहीं तीन सौ से ज्यादा महिलाओं पर पुलिसवालों ने लाठियां भांजी। ये महिलाएं यूं ही ठेका को बंद कराने नहीं पहुंच गईं, इस इलाके में पांच से अधिक लोगों ने बीते दो साल में शराब की लत से जान गंवाई है। 25 हजार से अधिक वोटर वाले इस इलाके में ज्यादातर परिवारों केपुरुष मजदूरी करते हैं। शांति बिहार की पूरन देवी कहती हैं कि बेटा किराए का टेंपो चलाता है, जो कुछ कमाता है, घर लौटकर ठेकेपर जाकर शराब में उड़ा देता है। हम ठेका बंद कराने का विरोध न करें तो क्या करें? सिठौरा की आशा कनौजिया शुक्रवार को हुई पुलिस कार्रवाई से जमानत पर छूटकर्र आईं हैं, वह कहती हैं कि पुरानी पीढ़ी को जो करना था सो कर लिया, हमारी लड़ाई से शायद नई पीढ़ी बिगड़ने से बच जाए। उनकेपरिवार केदो देवर होली पर शराब पीकर जान गंवा चुके हैं।
विज्ञापन


शराब ने तो कई परिवार उजाड़ दिए
जावित्री : सात मार्च को पुलिस कार्रवाई में जावित्री बुरी तरह घायल हो गईं जबकि उनकेभाई को पुलिस ने कड़ी धारा लगाकर जेल भेज दिया है।  दस साल पहले बिल्सी केयुवक से उनकी शादी हुई, पति शराब पीते थे। बताती हैं कि दो साल पहले एक रोज पति को कुछ दोस्त बुलाकर ले गए, नशे में दोस्तों में मारपीट हो गई और जिसमें गंभीर रूप से घायल पति ने कुछ दिन बाद दम तोड़ दिया था। इसकेबाद से जावित्री शांति बिहार में मां और भाई संग रहती हैं। अब भाई जेल में है, कमाई को कोई साधन न होने से परेशान हैं, जुगत कर रही हैं कि किस तरह भाई को जमानत दिलाएं।
मदन प्यारी : शराब के ठेके का विरोध करने सड़क पर उतरीं 45 वर्षीय मदन प्यारी बताती हैं कि शादी को कुछ समय ही हुआ था, शराब की लत में पति कोई काम नहीं करते थे, अचानक एक दिन शराब की लत में घर छोड़कर चले गए। उनका आजतक कोई पता नहीं। कहती हैं कि पति ने जो किया सो किया, पर ठेके के कारण छोटी उम्र में ही उनका बेटा भी शराब पीना सीख गया और अब शादी के बाद उसके बच्चे परेशानी झेल रहे हैं। 
विज्ञापन

 ब्रह्मादेवी : इनके 25 वर्षीय बेटे जितेंद्र के देहांत को महीना भर ही हुआ है।  ठेका केपास ही घर होने केकारण  बेटा पीना सीख गया, इस साल होली पर तबीयत बिगड़ी, पर उसने पीना नहीं छोड़ा, पीलिया में शराब पीने से 13 मार्च को नींद में ही उसकी मौत हो गई। बेटे केइलाज केलिए ब्रह्मादेवी ने कर्ज ले रखा है, कहती हैं उस दिन सिठौरा की महिलाएं इकट्ठी होकर्र आईं तो वह भी साथ चली गईं, बोली- ठेका बंद हो जाए तो आधे लोग सुधर जाएंगे।
-  हरेंद्र कनौजिया बताते हैं उनकेबड़े भाई सत्यप्रकाश कनौजिया (39) की दो साल पहले शराब की लत में मौत हो गई, मार्च में इनकेदूसरेभाई ओमप्रकाश ने भी शराब में जान गर्वांई। दोनों भाइयों के पांच बच्चों और भाभियों की जिम्मेदारी हरेंद्र के कंधे पर है। 
 ठेका तो दोबारा शुरू हो गया:
सात अप्रैल को हुए हंगामे केबाद ठेका बंद कर दिया गया था पर अब यह शराब का ठेका बाकायदा खुल रहा है। आबादी में ठेका होने केसवाल पर ठेके पर बैठे युवक ने कहा कि उनकेपास लाइसेंस है, बिना वजह केवह ठेका क्यों शिफ्ट करेंगे। तीन दिन पहले ठेके केपास से गुजर रही एक महिला पर शराबियों ने छीटाकशी कर दी थी। महिलाओं में धधक रहे गुस्से को यहां से बल मिला और सिठौरा की महिलाओं ने शांति बिहार आकर अपने साथ दूसरी महिलाओं को जोड़ा और ठेके के सामने जाकर खड़ी हो गईं। जिसकेबाद सात अप्रैल को बवाल हुआ।
ये ठेका तो बंद होने चाहिए:
सुप्रीम कोर्ट केदिशानिर्देशों का अगर शब्दश: पालन किया जाए तो यह ठेका बंद होना चाहिए।
मढ़ीनाथ (वार्ड नंबर 14) केनाम पर देशी शराब के ठेकेका लाइसेंस है, जबकि दुकान शांति बिहार (वार्ड नंबर 12) में खुली है। नियम है कि जिस क्षेत्र केलिए देशी शराब की दुकान को लाइसेंस आवंटित है, दुकान वहीं खोली जाए।
विज्ञापन

 ठेका शराब की शिव शक्ति मंदिर से दूरी सिर्फ 66 मीटर है, ठेका शराब केठीक सामने कन्या पाठशाला है जबकि एक अन्य स्कूल भी ठेका से नजदीक है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें