बरेली। भाजपा की ओर से शनिवार को एक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी में परिचर्चा आयाेजित हुई। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सदस्य अरुण सिंह ने कहा कि सरकारी मशीनरी वर्षभर कहीं न कहीं चुनाव कराती रहती है। इससे विकास कार्य ठप हो जाते हैं।
बताया कि केंद्रीय बल, शिक्षक या अन्य विभागों के कर्मचारी, अधिकारी सभी मूल कार्य छोड़कर चुनाव में समय देते हैं। आचार संहिता आदि कारणों से पूरे प्रदेश और देश में विकास ठप हो जाता है। काफी बजट भी खर्च हो जाता है। एक देश एक चुनाव होगा तो देश का धन बचेगा। इससे देश भी तरक्की करेगा। आजादी के बाद वर्ष 1952, 1957, 1962, 1967 में भी एक देश एक चुनाव हुए थे। 1983 में चुनाव आयोग ने भी इस पर जोर दिया था, पर कांग्रेस सरकार ने इसे नजरंदाज किया। लॉ कमीशन, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व में गठित कमेटी ने लोगों की प्रतिक्रिया ली और सुप्रीम कोर्ट के जज भी इसके पक्ष में थे। अब यह कानून बनने की ओर अग्रसर है।
इस दौरान सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार, ब्रज क्षेत्र के अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य, महापौर उमेश गौतम, महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना, डॉ. केएम अरोरा, एससी-एसटी आयोग के सदस्य उमेश कठेरिया, महानगर उपाध्यक्ष देवेंद्र जोशी, विष्णु शर्मा, तृप्ति गुप्ता, सीपीएस चौहान, अजय चौहान आदि मौजूद रहे।