बरेली। जीएसटी बेहतर कर प्रणाली है, पर विसंगतियों से व्यापारियों को आर्थिक, मानसिक रूप से जूझना पड़ता है। ट्रिब्यूनल की व्यवस्था न होने से पक्ष न रख पाने की वजह से कई व्यापारी अवसाद की चपेट में आ रहे हैं। अगर सरकार कारोबार का हित चाहती है तो विसंगतियां दूर करनी पड़ेंगी।
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल कोर कमेटी की बैठक में यह बातें चार्टर्ड एकाउंटेंट संजय अग्रवाल ने कहीं। एडिशनल कमिश्नर ग्रेड -1 ओपी तिवारी ने बताया कि बरेली का जीएसटी संग्रह प्रतिशत प्रदेश के सापेक्ष है। अगर किसी व्यापारी को समस्या है तो वे संपर्क करें और उचित सहयोग किया जाएगा।
संगठन के प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिन-रात कार्य करने वाला व्यापारी तमाम लोगों के रोजगार का जरिया भी है। धार्मिक, सामाजिक कार्यों में प्रतिभाग के साथ देश की अर्थव्यवस्था में भी सक्रिय रहता है। इसलिए बेवजह की खामी निकालने और उन्हें परेशान न किए जाने की अपील की।
महानगर महामंत्री राजेश जसोरिया ने बताया कि वैट में इनपुट क्रेडिट की कोई व्यवस्था नहीं थी। जीएसटी की तरह पोर्टल न होने से बिलों का फर्जीवाड़ा हो रहा था। जिसका खामियाजा व्यापारी भुगत रहे हैं। ऐसे में व्यापारी का पक्ष लेकर निदान की मांग की। यहां संजीव चांदना, अरविंद खंडेलवाल, राकेश अग्रवाल, दर्शनलाल भाटिया, दुर्गेश खटवानी व अन्य व्यापारी मौजूद रहे। ब्यूरो