गुरुद्वारा नानकपुरी की पहल पर ग्रामीणों ने वह काम कर दिया जिसके लिए वह एक दशक से सरकारों के आगे गुहार लगा रहे थे। उन्होंने टांडाछंगा से बिलासपुर को जाने वाली सड़क पर बरई नदी पर बने पुल पर कार सेवा के जरिए बंधा बना दिया। ग्रामीण बरई नदी के कटान से परेशान थे। बरसात में नदी का पानी गांव और गुरुद्वारे में भर रहा था। फसलें बर्बाद हो रही थी। सिर्फ 15 दिन के श्रमदान में पौने दो लाख रुपये खर्च कर ग्रामीणों ने अपनी सालों पुरानी समस्या का खुद ही निदान कर दिया। यदि सरकारी सिस्टम के जरिए यह काम होता तो न जाने कितने रुपये खर्च होते और अधिक समय भी लगता।
गुलड़िया भवानी गांव से बरई नदी गुजर रही है। दो दशक पहले भी कार सेवा के जरिए यहां पुल का निर्माण किया था लेकिन पिचिंग न होने के कारण बारिश के दिनों नदी का कटान ग्रामीणों को परेशान कर रहा था। डीएम, कमिश्नर से लेकर मुख्यमंत्रियों तक इस मामले को कई बार रखा गया। तहसील दिवस में भी ग्रामीण अपनी फरियाद लेकर जाते रहे मगर हर बार आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। ग्रामीणों ने नानकपुरी टांडा के बाबा बचन सिंह दिल्ली वालों के दरबार में इस मुद्दे को रखा। उन्होंने ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लिया। इसके बाद गुरुद्वारे के सेवादार बाबा गुरजंट सिंह पहल करने को कहा गया। गुरजंट सिंह ने ग्रामीणों से कारसेवा की बात कही तो वे राजी हो गए। इसके लिए 20 दिन पहले गुरुद्वारे में बैठक बुलाई गई। उसमें तय हुआ कि अब नेताओं और अफसरों के भरोसे बैठना बेकार है। अब आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। गुरुद्वारे के चढ़ावे के पौने दो लाख इसमें लगाए जाएंगे और ग्रामीण खुद यह काम करेंगे। संगत ने भी पूरा समर्थन देने का एलान किया। 15 दिन पहले काम शुरू हुआ। ग्रामीणों ने बढ़ चढ़कर कार सेवा की। मिट्टी और रेता बजरी के कट्टों से बंधा बनाकर समस्या का समाधान कर दिया।
ग्रामीणों ने गजब का काम किया है। गुरुद्वारे की पहल का उन्होंने सम्मान किया है। गुरुद्वारे की ओर से पहले भी बरई नदी और भैरपुरा गांव में लाखों की लागत से पुल का निर्माण कराया जा चुका है।
गुरजंट सिंह सेवादार, गुरुद्वारा नानकपुरी