ट्रांसपोर्ट नगर बसाने की जिलाधिकारी की पहल सराहनीय है लेकिन बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) तो बिना डंडा चलाए हिलता ही नहीं।
16 साल पहले तत्कालीन नगर विकास मंत्री लालजी टंडन ने ट्रांसपोर्ट नगर का उद्घाटन किया था। इसके बाद कई बार पहल होने के बाद भी बीडीए के काम न करने की वजह से ट्रांसपोर्ट नगर नहीं बस पाया। दो साल पहले तत्कालीन मंडलायुक्त विपिन द्विवेदी ने भी ट्रांसपोर्ट नगर बसाने के प्रयास किए लेकिन बीडीए के ढीलेपन की वजह से मामला आगे नहीं बढ़ा। कमिश्नर के ट्रांसफर होते ही सब कुछ ठंडे बस्ते में चला गया।
करीब डेढ़ साल पहले बीडीए ने ट्रैक मैकेनिकों और छोटे दुकानदारों के लिए 125 दुकानों के निर्माण के ऑफर मांगे थे। इनकी कीमत 3.5 लाख से लेकर 16 लाख रखी गई। बाद में बीडीए ने दुकान निर्माण की योजना स्थगित कर दी। वजह ये बताई गई कि ऑफर ही नहीं आए। ट्रांसपोर्ट नगर में बीडीए 11 सौ खाली प्लाट बेच चुका है। अधिकांश खरीदारों ने चार से छह प्लाट आवंटित करा लिए। अब वह इन पर निर्माण नहीं करा रहे। प्लाट खाली न होने के चलते ट्रांसपोर्टर्स और ट्रक मैकेनिक व्यवस्थित तरीके से कारोबार नहीं कर पा रहे हैं। सड़कें भी जर्जर हो चुकी है। बिजली न होने पर रात के अंधेरे में चोरी की आशंका रहती है। ट्रांसपोर्टर्स खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। इसलिए वह कोई न कोई बहाना बनाकर टीपी नगर में जाने से मना कर देते हैं।
‘ट्रांसपोर्ट नगर में दुकानों की खरीद के ऑफर मांगे गए थे लेकिन उस समय कोई आया नहीं। हम दुकानों के निर्माण के ऑफर दोबारा मांगेंगे। सड़क मरम्मत के लिए 50 लाख के टेंडर हो चुके हैं। 10 से 15 दिन में काम शुरू कराया जाएगा।’ अजय सिंह, चीफ इंजीनियर बीडीए