फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bareilly News: रजिया को भूख और गरीबी खींच लाई भारत

विज्ञापन
विज्ञापन
नवाबगंज। भूख और गरीबी रजिया को बांग्लादेश से भारत तक खींच लाई। पासपोर्ट की जांच में फंसने पर पुलिस ने उसे और उसके पति को हिरासत में ले लिया। शुक्रवार को दंपती को जेल भेज दिया गया।
विज्ञापन


रजिया उर्फ खातून बेेगम मूल रूप से ग्राम मनोहरपुर थाना केसरपुर जनपद जसोर बांग्लादेश की निवासी है। वर्ष 1988 में 20 साल की उम्र में गरीबी से तंग होकर वेलपुर बाॅर्डर से जंगल के रास्ते भारत में दाखिल हो गई। रजिया ने बताया कि वह भीख मांगते हुए बरेली के रिछा पहुंची। यहां मजदूर इस्माइल से मुलाकात हो गई। इस्माइल की पत्नी की मौत हो चुकी थी, उसने रजिया को घर में पत्नी की तरह रखा।
वर्ष 1996 से 2012 तक इस्माइल के साथ रही। इसी बीच इस्माइल की मौत हो गई, लेकिन रजिया की कोई संतान नहीं हुई। इससे पहले रजिया ने घरवापसी का मन बनाया और फर्जी दस्तावेज के सहारे पासपोर्ट बनवा लिया। बाद में वह समुहा गांव के पुत्तन शाह के संपर्क में आई। यहां रजिया ने दोबारा पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। इस बार पुलिस और एलआईयू की जांच में वह फंस गई। सभी दस्तावेज फर्जी मिलने पर उसके पति पुत्तन शाह पर रिपोर्ट दर्ज की गई।
विज्ञापन




रजिया बोली- ऐसी किस्मत किसी की न हो

रजिया ने बताया कि बांग्लादेश में उस समय भुखमरी और कंगाली का दौर था। परिवार में मां, पिता, भाई और बहनें थीं। घर के पुरुष मजदूरी करते थे और महिलाएं भीख मांगती थीं। उसके बाद भी चूल्हा ठंडा रहता था। उसने गांव में सुना था कि भारत में सिर छिपाने की जगह और भूख मिटाने का इंतजाम हो जाएगा, तभी वह पैदल निकल आई थी।बचपन में परिवार से दूर हुई, पर पत्नी की तरह घर बसाकर भी संतान का सुख नहीं मिला। दूसरे पति से भी कोई संतान नहीं हुई, पर सिर छिपाने को जगह मिल गई। अब लग रहा है कि बुढ़ापे में जेल में रहना पड़ेगा। इतना कहते ही उसकी आंखें भर आईं।

सिस्टम पर सवाल

पासपोर्ट बनवाकर दस साल पास रख चुकी थी बांग्लादेशी महिला

बरेली। नवाबगंज क्षेत्र में पकड़ी गई बांग्लादेशी रजिया से शुक्रवार को एजेंसियों से पूछताछ की। हालांकि, उसकी कोई गलत गतिविधि सामने नहीं आई है, पर सिस्टम की खामी की वजह से वह लंबे समय से भारत में रह रही थी। दस साल पहले उसका पासपोर्ट बना था, जिसकी मियाद खत्म हो चुकी थी। नया आवेदन करने पर मामला पकड़ में आया। महिला का वोटर कार्ड और राशनकार्ड भी रहा है।

पासपोर्ट बनवाने में ग्राम प्रधान, लेखपाल, थाना पुलिस की भूमिका होती है। इनके बाद पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों की संस्तुति के बाद ही यह बन पाता है। करीब दस साल तक रजिया के पास पासपोर्ट रहा। इसमें उस वक्त निचले स्तर से लेकर ऊपर तक सभी अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट लगा दी और मामला पकड़ में नहीं आया। यह गहन जांच का विषय है। जाहिर है कि दलालों की भूमिका के बाद हथेली गर्म होने पर आननफानन में पासपोर्ट में रिपोर्ट लगा दी गई होगी। कायदे से जांच होने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आधार बन सकता है।



महिला और उसके पति से पूछताछ की गई है। जांच में सामने आया है कि महिला अपने दूसरे पति की पत्नी के नाम से फर्जी दस्तावेज लगाकर पासपोर्ट बनवाना चाहती थी। पति-पत्नी को जेल भेजा गया है। - राजीव कुमार सिंह, इंस्पेक्टर नवाबगंज
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें